अंगार

My thoughts may be like 'अंगार'

84 Posts

1247 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3502 postid : 785

भारत-पाक मैच के बहाने......

Posted On: 29 Mar, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अभी परसों ही ताजा खबर टीवी चैनल्स और अखबारों में फ्लैश हुई-

 

 भारत और पाकिस्तान के मध्य मोहाली में होने वाले हाईवोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले के लिए सानिया मिर्जा जहां भारतीय टीम का समर्थन करती नजर आएंगीं, वहीं उनके पति शोएब मलिक पाक टीम की हौसला अफजाई करेंगे।  इस बहुप्रतीक्षित मुकाबले के बारे में सानिया ने माइक्रोब्लागिंग साइट ट्विटर पर लिखा कि युद्ध शुरू हो चुका है और मैं टीम इंडिया का सपोर्ट करूंगी। वहीं मेरे पति हमेशा की तरह पाक टीम का समर्थन करेंगे। मलिक ने सानिया की चुनौती स्वीकार करते हुए ट्वीट किया कि सानिया अब तैयार रहो, क्योंकि जंग शुरू हो चुकी है।

 

इस पाकिस्तानी जोड़े की खेल की दुकान तो लगभग बंद हो ही चुकी है. शोएब मालिक पाकिस्तानी क्रिकेट का दागी खिलाड़ी होकर टीम से बाहर हो चुका है और भविष्य में भी उसके लिए टीम में लिए जाने की संभावना नहीं दिखती. वहीं दूसरी ओर सानिया मिर्जा फिलहाल इक्के-दुक्के स्तरहीन टेनिस टूर्नामेंट खेल रही है और उनमें भी पहले या दूसरे राउंड में बाहर हो जाती है. इन टूर्नामेंट से कम से कम नहाने के लिए मुफ्त के दो-चार तौलिए और कुछ पैसों का फिलहाल इंतजाम हो ही जाता है. पर कुल मिला कर खेल की दुकान लगभग बंदी के दौर में पहुँच चुकी है.सानिया के शारीरिक ग्लैमर का भ्रम कुछ लोगों को अभी भी थोडा बहुत आकर्षित कर रहा है जिसके भरोसे विज्ञापनों से कुछ कमाई हो जाती है. इसी ग्लैमर और छोटे कपडों की वजह से ही सानिया भारतीय सनसनी बनी थी, न कि खेल की बदौलत. लेकिन झाग की सनसनाहट की तरह ही सानिया की ये सनसनाहट भी जल्दी ही खत्म हो जायगी और विज्ञापनों की ये दुकान भी जल्दी ही बंद हो जायेगी.  

 

अब क्योंकि इस जोड़े के पास फिलहाल कोई काम नहीं है तो शोनिया (शोएब+सानिया) ने सोचा होगा कि क्यों न क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत-पाक मैच के बहाने कुछ कुछ झाग उठाकर सनसनी फैलाने की कोशिश की जाय. हो सकता है कि इससे सानिया को कोई पुरुषों के अंडर गारमेंट, शेविंग क्रीम या तेल-साबुन का विज्ञापन हाथ लग जाय. आपने वो कहानी तो पढ़ी ही होगी कि ‘जोरू मिलेगी-जोरू मिलेगी, नहीं तो लफड़ा ही सही’. तो इस हथियार को आजमाने में हर्ज भी क्या है. यहाँ पे फालतू की ख़बरें हाई लाईट करने वाले मीडिया वालों की कमी तो है नहीं. जहां पहले से ही भारत में कितने ही पाकिस्तानी कलाकार और खिलाड़ी अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं और अवैध कृत्य खुल कर कर रहे हैं, तो दो-चार तो आसानी से खप ही सकते हैं. अभी पिछले दिनों ही पाकिस्तानी गायक राहत फ़तेह अली गैर कानूनी रूप से एक लाख डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत में लाते हुए दिल्ली एयर पोर्ट पर गिरफ्तार किये गए और बाद में कलाकार के नाम पर आसानी से मामूली जुर्माना वसूल कर छोड़ भी दिए गए. अदनान सामी के लिए लफड़े-झगडे करने और लिफ्ट होने के लिए पूरे विश्व में भारत से शानदार जगह कोई नहीं है. अब भले ही भारत के अपने कितने ही लोक कलाकार अपने ही देश में धूल फांक रहे हों या भीख मांग रहे हों, उनकी कला किसी की समझ में नहीं आती पर पाकिस्तानी कलाकारों की कला तुरंत दिल में उतर जाती है और उनको माला-माल कर देती है.     

 

वैसे भी दरियादिली में भारतीयों का पूरे विश्व में कोई जवाब नहीं है. जहां एक ओर इस समय अमेरिका और आस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश भी पाने यहाँ भारतीयों के बढते दबदबे से चिंतित हैं वहीं दूसरी ओर भारत में जिधर से चाहे उधर से तार बाड़ फलांग कर घुस जाओ. ऐसे देश के दलालों की यहाँ पर कमी नहीं है जो कि तुरंत ही इनके राशन कार्ड और वोटर कार्ड बनवा देंगे. पिछले दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को मजबूर होकर अपने भाषण में ये चिंता जाहिर करनी पडी कि जिस तरह से भारतीय अपनी उच्च दिमागी क्षमता के बल पर अमेरिका में अपना दबदबा कायम कर रहे हैं, वह अमेरिकियों के लिए चिंता की बात है. और आस्ट्रेलिया तो भारतीय छात्रों को पीट-पीट कर, हमले कर भगाने पे तुला है. क्यों? क्योंकि उन्हें भविष्य में अपने अस्तित्व को बचाने का संकट सामने दिख रहा है.

 

तो क्या भारत और भारतवासियों को अपने अस्तित्व का संकट नहीं दिखता??

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

13 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

March 31, 2011

आप सभी प्रियजनों की प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद. मेरा इशारा तो केवल उस पलायनवादी सोच और स्वार्थपरक मानसिकता की और है जो इंसान को अपनी जमीन (औकात) छोड़ देने को प्रेरित करती है. सचिन तेंदुलकर और विनोद काम्बली दोनों में कौशल था, पर अपने जज्बे, सोच और मजबूत मानसिकता के चलते आज हर तरफ सिर्फ सचिन तेंदुलकर का चर्चा है जबकि विनोद काम्बली कहीं भी नहीं है. उम्मीद है की आप मेरा तात्पर्य समझ गए होंगे. धन्यवाद.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 1, 2011

    जुबली कुमार जी …नमस्कार ! हम आपको समझ सके , हम नादानो में इतना सामर्थ्य कहाँ ….. फिलहाल तो जवाब देने से आप पलायन कर रहे है ??????????

allrounder के द्वारा
March 31, 2011

नमस्कार भाई राजेंद्र जी, आपने सही फ़रमाया अब इन दोनों के पास ज्यादा काम तो बचा नहीं टाइम ज्यादा है तो टाइम पास कैसे होगा यहीं भारत मैं ! और आपस मैं मैच फिक्स कर लिया ! खैर भारत की जीत पर हार्दिक बधाई !

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 30, 2011

अब भले ही भारत के अपने कितने ही लोक कलाकार अपने ही देश में धूल फांक रहे हों या भीख मांग रहे हों, उनकी कला किसी की समझ में नहीं आती पर पाकिस्तानी कलाकारों की कला तुरंत दिल में उतर जाती है और उनको माला-माल कर देती है विद्वान् श्री राजेन्द्र जी वजह साफ है मुंबई हमले से पहले उन दुष्टों के शानदार स्वागत की व्यवस्था हम में से किसी ने की थी ? अतिथि देवो भव कह कर ही न ?

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 29, 2011

प्रिय गोल्डन जुबली कुमार जी …… नमस्कार ! दोस्ती का इतिहास हमेशा से ही इस बात का गवाह रहा है की ‘लुड्की’ ने हमेशा से ही दो दोस्तों में दरार डालने का काम किया है …… सानिया जब शादी से पहले भारत के लिए खेलती थी तब वोह भारत की विशुद बेटी थी ……. मेरी तरह शायद आपको भी उसके कपड़ो पर अनावश्यक एतराज़ उठाने वाले कठमुल्लाओ से नफरत होती होगी ……. आपकी भूतपूर्व प्रेमिका से एक गलती हो गई है , इसका मतलब यह तो नही की आप हमेशा उसका हर बात पर विरोध करते रहे ….. यार कभी तो उसके लिए कुछ अच्छा कह दिया करो ….. शायद वोह दिन कभी ना आएगा …. हाय सानिया !

K M Mishra के द्वारा
March 29, 2011

भारत पाकिस्तान का क्रिकेट मैच है मोहाली में.. क्या यह संभव होगा की भारत के जितनें भी लोग मैच देखनें जायें वे पाकिस्तान की कर्तूतों के खिलाफ “काला रिबन” लगाकर अपना विरोध दर्ज करवायें.. उन्हें पता चलना चाहिये की भारत “नाराज” है…और मुंबई का जवाब मांग रहा है. इस विचार को सभी मित्रों तक पहुंचायें इस विरोध से पडोसी को कम से कम ये तो पता चल जायेगा की राजनैतिक चोंचले और होते है और जनता के विचार और. इसके अलावा हमारे समलैंगिक नेताओं को भी जनता के विचारों का पता चलेगा की जब हमे मुंबई याद है तो तुम कैसे भूल गए. दोस्तों इस विचार को ब्लॉग, एस एम् एस, फेसबुक, आर्कुट और way2sms.com के माध्यम से कोतदोपहर तक इतना घुमा दीजिए की मोहाली में हर भारतीय की बांह पर काला फीता हो.

shiromanisampoorna के द्वारा
March 29, 2011

राजेंद्रजी,bahut सुन्दर लेख/वाकई कितनी लज्जाजनक विषय है अपने लोगों की उपेक्षा और दूसरों के सम्मान में बिछ जाना निःसंदेह चिंतन का विषय भी है/

आर.एन. शाही के द्वारा
March 29, 2011

दिखता है राजेंद्र जी, अस्तित्व दिखता है । और जो दिखता है, वो बिकता भी है । यानी अस्तित्व बिकता है । हमारा तो सिद्धान्त ही है -’काले गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है ,कुछ और न आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है’। तो हम तो सानिया और शोएब से भी प्यार निभाएंगे, और उसी तरह अदनान और फ़तेह से भी । सौ-सौ जूते खाकर भी तमाशा घुसकर ही देखेंगे । क्योंकि भारतीय आतिथ्य परम्परा के भी तो अस्तित्व का ही प्रश्न है ! एक बात और साफ़ हो गई है कि सानिया और शोएब को आप अपनी इस ज़िन्दगी में तो नहीं भुला पाएंगे । साधुवाद ।

Harish Bhatt के द्वारा
March 29, 2011

आदरणीय राजेंद्र जी सादर प्रणाम, बहुत सही सवाल उठाया है आपने की क्या भारत और भारतवासियों को अपने अस्तित्व का संकट नहीं दिखता? लेख के लिए हार्दिक बधाई.

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 29, 2011

श्री राजेन्द्र जी, अगर ये उच्च विकसित दिमाग सही दिशा में चले तो कोई फायदा हो …लेकिन ये भारतीय दिमाग तो सिर्फ और सिर्फ खुराफात में ही चलते है…बहुत ही बढियां लेख… आकाश तिवारी

nishamittal के द्वारा
March 29, 2011

राजनीती व व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते हमारे राजनेता जो कर डालें वही कम है.भारतीय क्षमता का लोहा स्वदेश में तभी मन जाता है जब उस पर विदेशी ठप्पा लग जाता है.

abodhbaalak के द्वारा
March 29, 2011

sochne wala prashn uthaya hai aapne, kya ab sankat samaapt ho gaya? mai bhi yahi jaanna….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 29, 2011

\"जोरू मिलेगी-जोरू मिलेगी, नहीं तो लफड़ा ही सही\". बहुत अछे विषय उठाये हैं आपने.


topic of the week



latest from jagran