अंगार

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फिर मिलेंगे चलते-चलते

Posted On: 31 Mar, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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उनको बख्शी खुदा ने सूरत,
और हमको दी है दीद,
बरबस कह बैठे लाजवाब,
तो ‘राज’ की इसमें बात क्या है.

 

जिंदगी बीत गयी बेनूर,

न जाने किस नशे में,
हाँ जब वो करीब आये थे,
‘राज’ क्या नया सुरूर छाया था.

 

रुक तो जाते दो लम्हों को,
बात भी कर लेते तुमसे,
‘राज’ फाश से बेहतर,

चंद फासले अच्छे लगते हैं.

 

‘राज’ मिट गया है वो,
जो लिखा था किसी ने स्याही से,
न मिटेगा जिंदगी भर जो तुम,
दिल पे हमारे नश्तर से लिखो.

 

@ ‘राज’

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 20, 2011

हम है राही प्यार के , फिर कब मिलेंगे चलते चलते ?

Tufail A. Siddequi के द्वारा
April 3, 2011

राजेंद्र जी अभिवादन, बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

April 3, 2011

आप सभी प्रियजनों के स्नेह और आशीर्वाद के लिए आपका हार्दिक आभार.

razia mirza listenme के द्वारा
April 3, 2011

रुक तो जाते दो लम्हों को, बात भी कर लेते तुमसे, ‘राज’ फाश से बेहतर, चंद फासले अच्छे लगते हैं. लाजवाब………..

K M Mishra के द्वारा
April 3, 2011

कविता दिल को छु गयी. रतूडी जी नमस्कार.

Ramesh Bajpai के द्वारा
April 3, 2011

विद्वान् श्री राजेन्द्र जी कमल के पत्तो पर बूंदों के मोती से ये अहसास , अवर्णनीय वेदना के प्रतिबिम्ब बन झलक रहे है | बहुत बहुत बधाई | उनको बख्शी खुदा ने सूरत, और हमको दी है दीद, बरबस कह बैठे लाजवाब, तो ‘राज’ की इसमें बात क्या | ५\५

vinitashukla के द्वारा
April 3, 2011

सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति. बधाई.

rajkamal के द्वारा
April 1, 2011

राज’ मिट गया है वो, जो लिखा था किसी ने स्याही से प्रिय गोल्डन जुबली कुमार जी ….नमस्कार ! आपके दिल पर लिखा हुआ मिट गया है और मैं उनकी आत्मा पर अपना नाम लिखवाना चाहता हूँ “लिख दे तेरी रूह पे जो मेरा नाम वोह स्याही ढूंडा करते ह” …. इस सुंदर रचना ने राजेन्द्र का राज़ भी खोल करके रख दिया है …. मुबारकबाद

nikhil के द्वारा
April 1, 2011

‘राज’ फाश से बेहतर, चंद फासले अच्छे लगते हैं. बहुत खुबसूरत अंदाज है खुबसूरत ख्याल है …

allrounder के द्वारा
April 1, 2011

नमस्कार भाई राजेंद्र जी, बेहतरीन रचना पर हार्दिक बधाई !

Harish Bhatt के द्वारा
April 1, 2011

rajendra ji saadar pranaam, dil ko chhu jaane wali rachna ke liye हार्दिक धन्यवाद.

alkargupta1 के द्वारा
April 1, 2011

राजेन्द्र जी, चित्रमय बहुत सुन्दर प्रस्तुति ! अंतिम चार हृदय की गहराइयों को व्यक्त कर रहीं हैं !

abodhbaalak के द्वारा
April 1, 2011

राजेंद्र जी चित्रों और शब्दों का ज़बरदस्त संगम… बहुत सुन्दर ग़ज़ल, वैसे आपना तखल्लुस बदल दें, वरना राज से लोग राजकमल न समझ ले .:) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Aakash Tiwaari के द्वारा
April 1, 2011

श्री राजेन्द्र जी, आज दिल बहुत खुश हुआ आपकी ये उम्दा रचना पढ़कर…बहुत ही अच्छी रचना.. पढ़ते-पढ़ते दो लाइन बनी है जो पेश है… **************************************** जब वो तड़प उठे हमारी याद में, मेरे प्यार का तब उन्हें अंदाजा हुआ. आज ढूंढेंगे मुझको वो पुरानी गली में. ‘आकाश’ मिलेगा कब्र में दफनाया हुआ.. ******************************************* आकाश तिवारी

MALKEET SINGH JEET के द्वारा
April 1, 2011

दिल का दर्द हम यूँ आँखों से न बहने देते काश वो कुछ देर और हमे चुप रहने देते बढ़िया राजेंद्र जी http://jeetrohann.jagranjunction.com/2011/03/27/%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be-holi-contest/

दीपक पाण्डेय के द्वारा
April 1, 2011

बहुत खूब !

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 1, 2011

भईया, यही किस्मत है, यही हकीकत है| अपनापन ही सही समय पर यहाँ खींच लाया जो अभी-अभी में आपकी यह पोस्ट दिखी और पहला मैं ही हूँ जो यहाँ लिख रहा हूँ| सबसे पहले इस्तकबाल में, ”हुज़ूर आपका का भी एहतराम करता चलूँ, इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ|” “यहाँ भले ही फ़ासले हो गए हों मगर दिलों की नज़दीकियाँ उन्हें मिटा देंगी,वो रहेंगे हमारी यादों में और ये यादें उन्हें दुआ देंगी|” अतुलनीय आदर और प्रेम सहित, आपका भाई…….. :’(


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