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टाटा-अंबानी से बाबा-अन्ना और रब्बानी तक

Posted On: 14 Aug, 2011 Others में

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हालांकि काम की व्यस्तता के चलते अप्रैल में जब ब्लॉग्गिंग से ब्रेक लिया था तब से अब तक इस देश और इस जंक्शन पर भी बहुत सा पानी बह चुका है फिर भी जमीन में इतनी नमी तो दिखती है कि इस पर कम से कम इतनी घास तो जमा ही ली जाय कि इस वैचारिक हरियाली के योगदान में शायद कहीं हमारा भी नाम आ जाए| अपने इस अल्प ब्लॉग्गिंग काल में यदि कोई उपलब्धि मैंने हासिल की है तो वो है राजकमल जी से जुबली कुमार की उपाधि| अगर इस जंक्शन पर जुबली कुमार की वापस संभव हुई है तो इसका बहुत कुछ श्रेय भाई राजकमल के प्रयासों को जाता है जो लगातार मुझे यहाँ वापस आने के लिए प्रेरित करते रहे| अब कोई इस बात को माने या न माने, पर जागरण जंक्शन को जो योगदान राजकमल देते हैं उसके लिए यदि मेरे वश में होता तो मैं भाई राजकमल को विशेष तौर पर सम्मानित करता| इनकी राजकमलिया हरकतें और सक्रियता इस प्लेटफार्म पर जीवन्तता बनाए रखती है| बल्कि कई बार तो मुझे शक भी होता है कि कहीं ये बन्दा जागरण वालों का अपना ही आदमीं तो नहीं| खैर, मेरी इस बात से राजकमल जी को जागरण से कोई सम्मान मिले न मिले, पर उनका इतना खून तो निश्चित ही बढ़ जाना चाहिए कि वो अपने जीवन का पहला रक्तदान तो कर ही सकें|

 

इतने दिनों तक इस जंक्शन से दूर रहकर मेरी स्थिति भी वीरेंदर सहवाग की सी हो गई है| चल गया तो ठीक वरना फिलहाल टीम में तो घुस ही जाऊँगा| अब इस बीच देश में जो कुछ हुआ उसे इस एक लेख में लपेटना तो संभव नहीं है, पर कहीं से तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी| रतन टाटा का वर्षों बड़े जतन से संभाला हुआ ब्रह्मचर्य नीरा राडिया के सौंदर्य के वशीभूत होकर लडखडा गया | टाटा और राडिया के बीच हुई बातचीत का टेप लीक होने से जब ये बाते सार्वजनिक होने लगीं तो मजबूर होकर टाटा को अदालत में गुहार लगानी पडी कि ये उनके निजी अधिकारों का हनन है| रतन टाटा को मुकेश अम्बानी के सत्ताईस मंजिले महल से भी परेशानी होने लगी कि भला तेरी कमीज मेरी कमीज से सफ़ेद कैसे? अब भला चार लोगों का बड़ा परिवार सिर्फ सत्ताईस मंजिले भवन में किसी तरह से गुजारा करने को तैयार हैं तो लोगों को क्यों परेशानी हो रही है| आखिरकार सताइसवीं मंजिल से बंदा कोई आसमान थोड़े ही छू लेगा, आएगा तो उतर के जमीन पर ही| क्या मंहगे जूते पहन कर आदमी जमीन छोड़ देता है? आसमान की सीमा भले ही अनंत हो पर इसने आज तक किसी को अपने में जगह नहीं दी| ये गुण तो सिर्फ धरती में ही है कि वो अमीर और गरीब को समान रूप से अपने में समा लेती है| आसमान में जगह चाहिए तो जमीन पर उतरो और जमीन पर रहने वालों के लिए कुछ करो|

 

आईपीएल का नाम बदलकर किट्टी पार्टी कर देना चाहिए क्योंकि अब इसमें क्रिकेट का खेल कम रह गया है और धनाढ्य घरों की महिलाओं की मौज-मस्ती ज्यादा बढ़ गई है| पैसे वाले लोग अपनी पत्नियों या प्रेमिकाओं की बोरियत दूर करने के लिए अब करोड़ों रूपये की बोली लगाकर खिलाड़ी खरीदकर उन्हें देते हैं कि जाओ जी भरकर खेलो| अब आप इन बड़े घर की महिलाओं को मैदान पर खरीदे हुए खिलाड़ियों से गले मिलते या चुम्बन लेते-देते लाईव देख सकते हैं| मुझे पूरा विशवास है कि आप लोगों ने आईपीएल से पहले कभी नीता अम्बानी की शक्ल भी नहीं देखी होगी? प्रीती जिंटा जब उछल-उछलकर खिलाड़ियों को चुम्बन देती हैं तो ऐसा लगता है कि क्रिकेट के प्रति उनका प्यार और समर्पण शिल्पा शेट्टी और दीपिका पादुकोण से कहीं ज्यादा है|

 

विजय माल्या न सिर्फ शराब बेचते हैं बल्कि खुद भी खुले आम पीते हैं, यह सब टीवी पर देखना भी आईपीएल की वजह से ही संभव हो पाया| ये माल्या के अपार धन का कमाल और बेटे के प्रति असीम स्नेह ही है कि उन्होंने अपने बेटे को मनोरंजन के लिए दीपिका भी दे रखी है, वरना आपने कभी लंगूर के बगल में हूर देखी है? चौका मारे राहुल द्रविड़ और प्यार मिले सिद्दार्थ को, वाह भई वाह| आईपीएल ने बौलीवुड अभिनेत्रियों के लिए साइड बिजनेस के द्वार भी खोल दिए हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में दुकान न चले तो इधर पैसा और मनोरंजन दोनों है बस अपना ग्लैमर और खुलापन बनाए रखो|

 

पहले खिलाड़ियों की क़द्र होती थी उनके खेल और रिकार्ड से, अब होती है उनकी नीलामी की रकम से| जो महंगा बिका वो ही सिकंदर| ये आईपीएल का ही कमाल है कि यहाँ सचिन तेंदुलकर, रिकी पोंटिंग जैसे धुरंधरों की वो औकात नहीं है जो कि कैरेन पोलार्ड जैसे अनजान लेकिन बल्लाभांजू खिलाड़ी की है क्योंकि यहाँ खेल नहीं मनोरंजन चाहिए| सौरभ गांगुली जैसे महान खिलाड़ी की नीलामी पैसे वालों की महफ़िल में मजाक बन कर रही गई| बहुत साल पहले ‘सारिका’ में एक कहानी पढ़ी थी जिसमें एक अमीर आदमी अपने मित्र से इस बात को साबित करने पर शर्त लगा लेता है कि पैसे के लिए कोई भी आदमी जूते भी खा सकता है | इसके लिए वह शहर में घोषणा करता है कि दो जूते खाने के बदले धन दिया जायगा| धीरे-२ वह धनराशि इतनी बढा देता है और बड़े-बड़े लोग जूते खाने आने लगते हैं और अंततः एक दिन उसका वह दोस्त भी कम्बल में मुंह छुपाकर जूते खाने आ जाता है| वो कहानी आज के परिदृश्य में बिकुल फिट बैठ रही है| मनुष्य पैसा कमाने के लिए अपना ईमान-धर्म, अपनी इज्जत, अपने संस्कार सब कुछ किनारे रखकर जूते खाने को तैयार है, बशर्ते पैसा मिल जाय|

 

पुट्टपर्थी के साईंबाबा को उनके भक्त जिनमें सचिन तेंदुलकर भी एक हैं, भगवान मानते थे….बल्कि हो सकता है कि अब भी मानते हों| भगवान बनने के लिए साईंबाबा ने वही सब करतब किये जो हमारे देश की गलियों में एक आम मदारी भी करता है| पर हर मदारी भगवान नहीं बन सकता | इसके लिए उसमें कुछ अन्य क्षमताएं भी होनी चाहिए जो कि साईंबाबा में थीं| एक आम आदमी कितना ही लालची भी क्यों न हो, तकिये के नीचे सोना-चांदी और धन रखकर चैन से नहीं सो सकता पर भगवान इतने सालो तक अरबों-खरबों की धन-संपदा के बीच चैन से सोते रहे| अब भगवान नहीं रहे तो इस बात का आंकलन किया जा रहा है कि भगवान होने के लिए कितना धन होना चाहिए| पद्मनाभ मंदिर के अपार खजाने का तो अभी तक आंकलन ही नहीं हो पाया है कि है कितना | टीवी चैनलों पर समझदारों के बीच चर्चा हो रही है कि इस खजाने का क्या करना चाहिए| बेवकूफ कह रहे हैं कि इस खजाने से देश की गरीबी दूर हो सकती है, जबकि समझदार कह रहे हैं कि इसे ऐसे ही पड़ा रहने दो बल्कि इसकी देख-रेख और सुरक्षा का प्रबंध भी करो| मतलब घी सूंघते रहो पर इसे खाओ नहीं| जाहिर है कि बात समझदारों की ही मानी जाती है|

 

आजकल सारे देश में स्विस बैंकों में जमा काले धन का हो-हल्ला मचा हुआ है| हल्ला मचाने वाले दावा करते हैं कि यदि ये धन देश में आ जाय तो देश की गरीबी मिट जायगी| जिनकी गरीबी मिटानी है उन बेचारों को तो समझ ही नहीं है कि काला धन कौन सा है और सफ़ेद धन कौन सा |कुछ समय पहले पढ़ा था कि हमारे देश में गरीबों, महिलाओं, पिछडों सबके उत्थान के लिए कई योजनाएं हैं पर इन पर बहुत कम काम हो पाता है क्योंकि जिनके लिए ये योजनाएं हैं उन्हें इनका पता ही नहीं|

 

ये कमबख्त गरीबी भी कैसी विचित्र है जो सिर्फ काले धन से ही दूर होगी, क्यों ये सफ़ेद धन से दूर नहीं होती| और ये काला धन काला कैसे हो गया? अगर ये देश में रहता तो सफ़ेद रहता, कमबख्त स्विस बैंक की काजल की कोठरी में घुस गया तो काला तो होना ही था| सोचता हूँ कि कभी ईश्वर ने कृपा की और मैंने भी स्विस बैंक में खाता खोल लिया तो क्या मेरा धन भी काला होकर मुझे अभिभूत करेगा? यहाँ देश में कौन सा मेरा धन सफ़ेद रह पाता है| एक रूपया सफ़ेद कमाता हूँ तो तीस पैसे तो तुरंत ही अपना मुंह काला कर लेते हैं, दर्शन तक नहीं देते| दर्शन देकर करेंगे भी क्या, अब मेरे जैसा इज्जतदार आदमी तो इन कलमुहों को अपने पास रख नहीं सकता| इसलिए सोचता हूँ कि काला धन कमाने में ही महानता है क्योंकि पब्लिक चाहे लाख गला फाड़ ले, न तो इसे कोई निकाल पायेगा और न ही कमबख्त गरीबी दूर होगी, पर इसके साथ हमेशा ये महान तथ्य जुडा रहेगा कि गरीबी इसी से दूर होगी|

 

अब जो लोग काले धन का हिसाब-किताब जनता को बता-बता कर अपने गले फाड़ रहे है, उनकी एक उंगली दूसरों की तरफ है और तीन उंगलियां अपनी तरफ| ये हम हिंदुस्तानियों की खासियत है कि जब तक दोस्त हैं, सबकुछ बर्दाश्त करते हैं पर दुश्मनी की तो ढंग से रगड देंगे| जब तक सब ठीक था, सरकार रामदेव की तीन उंगलियां देख ही नहीं रही थी, पर जैसे ही आपस में बिगड़ी, रामदेव और उसके चेले के कागज़-पत्तर खंगालने शुरू कर दिए| बाबा का काला धन जो कि सफेदी ओढ़े हुए था, अचानक से अपना काला रंग दिखाने लगा| पर चाहे कुछ भी हो, बाबा रामदेव की दिल्ली के रामलीला मैदान पर उछल कूद और कूद-फांद का सीधा प्रसारण देखकर मुझे पक्का यकीन हो गया कि योग में कुछ तो ऐसा है कि इससे एक नॉन-स्पोर्ट्समैन भी आधा-एक घंटे तक पुलिस वालों को छकाने का स्टैमिना तो पा ही सकता है| हालांकि अंत में पुलिसिया डंडे का योग ही भारी साबित हुआ| पुलिसिया दण्ड के प्रकोप से बचने के लिए एक महान योगपुरुष को अंततः अपना पौरुष किनारे रखकर स्त्रियों के वस्त्र पहनने पर मजबूर होना पड़ा| राजनीति के खुर्राटों द्वारा एक अति उत्साही राजनेता का उदय होने से पहले ही दमन कर दिया गया|

 

कभी सोचता हूँ कि धन कौन सा बड़ा है, काला वाला या सफ़ेद वाला? लोग नाहक ही काले धन के पीछे पड़े हैं जबकि काले धन का जनक ये कमबख्त सफ़ेद धन ही है|  गरीबों की गरीबी भले काले धन से दूर हो पर बड़े लोगों की गरीबी तो ये सफ़ेद धन ही दूर करता है| चाहे तो कलमाडी, राजा, कनिमोई, करूणानिधि, शीला किसी से भी पूछ लो, सबके सब मोहम्मद रफ़ी का गाना गा रहे हैं- झोलियाँ भर गईं सबकी कोई खाली न गया| इन सबने जनता की गाढी कमाई के सफ़ेद धन से ही काला धन कमाया है| हमारे देश के जितने भी बड़े-२ मंदिर, मठ और ट्रस्ट हैं, अकूत धन संपदा बटोरे हुए हैं पर इनका हिसाब-किताब पूछने वाला कोई नहीं है, बल्कि इन्हें इनकम टैक्स से भी विशेष छूट है| साथ ही ये लोगों के काले धन को सफ़ेद में बदलने में और इनकम टैक्स से छूट दिलवाने में भी मदद करते हैं| वहीं दूसरी ओर एक आम कर्मचारी के वेतन के हाथ में आने से पहले ही कुत्ते फेल हो जाते हैं और थामते-थामते भी तीस प्रतिशत इनकम टैक्स के गड्ढे में स्लिप मार ही जाता है|

 

अन्ना हजारे की शोहरत नित नए कीर्तिमान बना रही है| ताजा सर्वे में गूगल सर्च पर अन्ना ने लेडी गागा को पछाड दिया है| अन्ना ने शोहरत पाई है पुण्य के रास्ते पर चलकर जबकि लेडी गागा ने शोहरत पाई पॉप का रास्ता अपनाकर| आखिरकार पुण्य पॉप पर इक्कीस साबित हुआ| अन्ना फक्कड प्रवृत्ति के और सीधे दिमाग वाली शख्सियत हैं पर उनके साथ जुड़े लोग तो पढ़े-लिखे और समझदार हैं| इसलिए टीम अन्ना को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कहीं लोकपाल बिल पर बेवजह की जिद इस आंदोलन की उपलब्धियों पर पानी न फेर दे| टीम अन्ना की जिद है कि प्रधानमंत्री को भी इसके दायरे में लाया जाय| यदि ऐसा हो गया तो कोई भी सरकार चार दिन से ज्यादा चल ही नहीं पायेगी और देश में राजनैतिक अस्थिरता रहेगी| इसलिए वर्तमान बिल में कार्यरत प्रधानमंत्री को इसके बाहर रखा गया है और कार्यकाल पूरा करने के बाद इसके दायरे में लाया गया है|

 

और अंत में चलते-चलते बात पाकिस्तान की नई विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की| पाकिस्तान की पहली महिला विदेशमंत्री हिना रब्बानी भारत दौरे पर आईं तो हमारे मीडिया ने उनकी ख़ूबसूरती, उनके महंगे पर्स/ हैंडबैग, उनके शौक और पहनावे जैसी बातों पर ज्यादा हाईलाईट किया और उनकी काबिलियत पर कम | मुझे ये जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि पाकिस्तान में सांसद बनने के लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है जबकि हमारे देश में कोई भी पांचवी-आठवीं पास प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है| यहाँ तक कि बिना चुनाव लड़े भी प्रधानमंत्री बन सकते हैं, चुनाव और जीत बाद में मैनेज की जा सकती है|

 

लेख समाप्त करते-२ ये दुखद समाचार सुना कि शम्मी कपूर नहीं रहे| अभी कुछ दिन पहले ही फेसबुक पर शम्मी और शशि दोनों भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की थी| किसे पता था कि अपने समय का बौलीवुड का ये बड़ा सितारा जल्दी ही अस्त हो जायगा| शम्मी कपूर की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वे कपूर खानदान के एकमात्र ऐसे सदस्य थे जिन्होंने आर के बैनर की फिल्मों में काम किये बिना ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, और उनके लटकों-झटकों तो कहना ही क्या| ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे|

 

सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं|

 

वन्देमातरम् |

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

August 19, 2011

आप सभी सम्मानित और विद्वान महापुरुषों का मैं ह्रदय से आभारी हूँ कि आप लोग मेरा मन रखते हैं, शायद आप नाराज भी होते हों कि मैं प्रतिक्रियाओं का जवाब नहीं दे पा रहा हूँ लेकिन आप लोग इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं कि यहाँ इस ब्लॉग पर हजारों लोगों के बीच कहीं किसी भी माध्यम से हम लोग आपस में जुड़े है…..मैं आप लोगों से क्षमा चाहता हूँ कि मैं प्रतिक्रियाओं से दूर रहना चाहता हूँ. न मुझे ज्यादा चर्चित होना है, न ज्यादा पठित होना है, न ही मुझे कोई पुरस्कार चाहिये ….बस विचारों की अभिव्यक्ति करना ही मेरा एकमात्र उद्देश्य है …… अतः मैं आपके लेखों पर कमेन्ट न दे पाऊं या अपने लेख पर कमेन्ट का जवाब न दे पाऊं तो आप ये न समझें कि मैं आपके विचारों को सम्मान नहीं दे रहा ………..बस मैं इस सबसे दूर रहना चाहता हूँ……….पर हाँ कभी ये हो सकता है कि मैं चुप भी न रह पाऊं….. मुझे  पूरी उम्मीद है कि आप मुझे इसके लिए क्षमा करेंगे……. धन्यवाद….

praveen के द्वारा
August 19, 2011

हद कर दी आपने इतना बढ़िया लेख अब पोस्ट किया आप वाकई जुबली कुमार हो ,पर बाबा रामदेव पर थोडा रहम खाओ ,

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 15, 2011

विद्वान् श्री राजेंद्रजी बुढ़ापे का शरीर है सो आत्मीय श्री “शाही जी की कलम से लेकर १५ अगस्त तक के बीच का व्योरा बिना पलक हिलाए पढना ,{ इस बीच पता नहीं साँस क्या कर रही थी ) साधारण काम है क्या ? कमाल कर दिया आपने | देर से दुरुस्त भला | पर श्री राज कमल पुत्तर के इनाम की सिफारिस के साथ यह भीतो बता देते की जनाब है कहा ? बाकि सब बल्ले बल्ले |

    rajkamal के द्वारा
    August 19, 2011

    बिछड़े थे तो इस वायदे के साथ की फिर मिलेंगे चलते -२ लेकिन अब जो मिले है तो रुकते -२ जय हो

Santosh Kumar के द्वारा
August 14, 2011

आदरणीय राजेंद्र जी ,.सादर नमस्कार आज पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ने का सौभाग्य मिला ,.. क्या कहूं ?,.. मजा आ गया ..

आर.एन. शाही के द्वारा
August 14, 2011

इतने दिनों तक दुनिया को विहंगम दृष्टि से पीने के बाद अच्छी उगाल मारी है राजेंद्र जी । बधाइयां ! मुझे पता था कि सबकुछ हजम कर जाने के बावज़ूद हिना रब्बानी को अधिक दिन नहीं पचा पाएंगे, सो छुपी भावनाओं का वमन कर ही दिया । मरहूम हज़रत राजकमल जी शर्मा को भी बेहतर श्रद्धांजलि अर्पित की है । कुल मिलाकर फ़िल्म चलेबुल है, उतरेगी नहीं । धन्यवाद ।

    rajkamal के द्वारा
    August 19, 2011

    तो आदरणीय आप भी आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने के लिए ….. ********************************************************** सुना था की ग़ालिब के उड़ेंगे पुर्जे तमाशा देखने हम भी गए मगर कुछ न हुआ

abodhbaalak के द्वारा
August 14, 2011

श्रीमान जी आते साथ ही सिक्सर मार दिए हैं आपतो, विशाल लेख पर कहीं भी ऐसा नहीं लगा की ………….. ऐसे ही न थोड़ी गुरु जी आपको जुबली …. :)

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 14, 2011

सुस्वागतम भईया… अनुज के लौटने के पश्चात् अग्रज का शुभागमन कितना सुन्दर लग रहा है। देश के खिचड़ी हालात का आपने बहुत ही अच्छा जायज़ा लिया है। हुनर की धनी आपकी लेखनी से निकला यह लेख रोचक होने के साथ ही बहुत कुछ सोचने को भी मजबूर करता है। आशा है कि जे जे के द्वारा आपकी मेरी तरह बेकदरी नहीं की जाएगी और यह लेख अवश्य ही फ़ीचर्ड श्रेणी में आएगा। पुनः शुभकामनाओं के साथ,


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