अंगार

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वार्तालाप चालू आहे...

Posted On: 24 Sep, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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गतांक से आगे…….

 

दूसरा  : कल के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ| अगल-बगल सारे लोग बदहाल थे माहौल गरम हो गया था इसलिए मुझे फोन काट कर हस्तक्षेप करना पड़ा|उसी में समय लग गया| वैसे sms मिला होगा आपको|

पहला : एस एम् एस तो सुबह देखा, नींद आ गई थी.

दूसरा  : मैं जानता था रात बहुत हो गयी थी ……इसीलिये sms भेजा था| खैर ……. की तो अच्छी क्लास  ले ली आपने|

पहला : हाँ कल अच्छी क्लास ले ली …..

इतनी साहित्यिक भाषा में उसके पिताजी ने भी उसे कभी नहीं समझाया होगा……

दूसरा  : बाकायदे ले ली……हम भी खुल के समर्थन में आ गए हैं..

पहला : हाँ देखो …..भाई से भी उलझ रहा है…

दूसरा  : बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है बेवक़ूफ़ ने| अब उसके बदन के सूजने का वक़्त क़रीब आ गया है|

पहला : बर्र तो फिर भी सुजा के छोड़ देती है, हम तो सुजा के बैठक पे एक ऐसी लात भी देंगे कि जीवन भर इठला के चलेगा……

दूसरा  : आपने तो शून्य गुरुत्वाकर्षण में ही पहुंचा दिया है उसे chandni chowk to china के मिथुन वाली लात याद आ गयी|

पहला : स्साला रिरिया रहा था कि …..

दूसरा  : मगर आपने सही फ़ैसला किया…..वो पीतल की नली में १२ साल भी..तब भी कोई फ़र्क नहीं|

पहला : अब परशुराम का फरसा चल दिया तो चल दिया…….

दूसरा  : सबकुछ काट कर ही रुकेगा|

पहला : स्साले को दो चार गालियाँ पंडित जी,……. आदि के तरफ से भी ठोक दो….

दूसरा  : भईया घबराएं नहीं..पंडित जी तो इसीलिये मशहूर ही है..उसकी तो…सारा खानदान एक कर देंगे.

पहला : जरा दो मिनट…..

दूसरा  : ठीक है..
 

दो मिनट की खामोशी…… 

 

पहला : तमाम शहर के रास्ते सजा दिए जांय, हम आ गए हैं तो कांटे बिछा दिए जांय….

दूसरा  : गिरते को सहारा देना फ़र्ज़ है अपना,

जो सर पर चढ़ जाये उसे मसलना भी आता है;

पहला : सही बात है, कल का लौंडा सर पर चढा जा रहा था…….बेवकूफ समझ रहा है सबको…

दूसरा  : जला कर राख कर दूंगा..नई फिल्म बनने वाली है.

पहला : हां…..हां……ब्लॉग को जला दो…….

दूसरा  : मगर उसे ये मालूम नहीं था कि यही हश्र उसका होने वाला है| शऊर तो है नहीं लेखन का बस इधर-उधर का टीप लेता है| बाप न मारे पूतडी, बेटा तीरंदाज़..

पहला : दुरुस्त कहा………किताब वाले का कमेन्ट नहीं आया…..

दूसरा  : लिंक भेजा था क्या राजू भाई ने..?

पहला : इस उल्लू के चरखे…………… ने उलझा दिया, मैं तो भूल ही गया.

दूसरा  : चलिए देर आयद दुरुस्त आयद..भेज ही डालिए..

पहला : हाँ आज ही भेजता हूँ……

दूसरा  : कम्बख्त कुछ न कुछ तो करेगा ही..

पहला : आत्म-केशलोचन…….

दूसरा  : काश के वो हसीन मंज़र हम भी देख पाते..

पहला : ये खूसट लोग वेलेन्टाइन किंग बनने के लिए जान लड़ाए हुए हैं …….अपने लेख सबको मेल पर भेजते हैं आजकल ……क्या तुम्हे भी आया किसी का….

दूसरा  : अभी तक तो नहीं. और अगर आया भी तो आप जानते ही हैं हम तो अव्वल और परले दर्ज़े के …..ऐसा डसेंगे कि..

पहला : न्यू ईयर पर सबके इ-मेल एड्रेस इकट्ठे कर लिए इन्होंने…….

दूसरा  : आने तो दीजिए किसी की मेल..अगर AKL नहीं करवा दिया तो.

पहला : AKL…..?

दूसरा  : आत्म केश लोचन….. हा हा हा हा ….अपना ही डायलॉग भूल गए आप.

पहला : ओह्ह…..क्या बात है यार छोटे……मजा आ गया……मेरी तो स्साली बुद्धि ही ठप्प हो गई है……

दूसरा  : कल तो वाकई अंगारे की तरह सुर्ख हो गए थे आप ऐसा लगता है.. शायद यही वजह रही हो..

पहला : बस यूं समझो कि उस चिरकुट की किस्मत थी कि वो मेरे सामने नहीं था……..

दूसरा  : वर्ना सर पर पाँव रख कर भागने की नौबत थी..

पहला : भागता तो तब जब उसकी राख भी बचती…….

दूसरा  : हम्म्म… तब तो उसकी राख भी हवा में भांगड़ा करती नज़र आती|

पहला : १३ तारीख की रचना तैयार है क्या?

दूसरा  : जी बिलकुल दो दिन हो गए ड्राफ्ट में रखी हुई है. रातों को जाग कर सब फाइनल कर डाला है.

बस आशावाद की जगह निराशावाद झलकेगा इस बार.

पहला : जितनी पुरानी….मतलब ड्राफ्ट में,……..उतना नशा देगी……जितने भी वाद-विवाद हो उतना अच्छा………

दूसरा  : सही कहा, चर्चा में रहने का यही तरीका है…. अच्छा एक बात तो हम लोगों ने आज तक की ही नहीं..आपका पसंदीदा ब्रांड कौन सा है.?

पहला : भाई, वैसे तो मैं रम ज्यादा पसंद करता हूँ, …..रम में ओल्ड मोंक, मैक्डोवेल …….और बाकी दोस्तों के प्यार में व्हिस्की में…..ब्लेंडर्स प्राइड, रोयल स्टेग…….बाकी जो भी मिल जाए…..

दूसरा  : व्हिस्की में तो अपनी एक जैसी चॉईस है बड़े….यहाँ भी दिल मिल गए..मगर चूँकि इधर उतना ठंडा मौसम नहीं रहता इसलिए rum बस घनघोर सर्दी के वक़्त ही..कभी Bacardi Black ट्राई कीजिये rum में.

पहला : ठीक कहते हो …गर्मी में रम खपाना……..देखूँगा अगर इधर बेकार्डि मिलेगी तो….

आज घर जल्दी निकलना है …तो क्या मैं चलूँ….

दूसरा  : बहुत प्यारा टेस्ट है बड़े,  कुछ wine का भी ब्लेंड है उसमें. दाम भी वही ब्लेंडर्स प्राइड वाला ही है……आज मैं ज़रूर फोन करूँगा १० बजे के बाद.

पहला : ढल गया दिन, हो गई शाम, जाने दो पीना है.

दूसरा  : :-)

पहला : बिलकुल बकार्डी ट्राई करूँगा……

दूसरा  : हिच्च्च्च

कहीं हम गिर न पड़ें…हीही..

अरे हम तो गिर पड़े….

पहला : अच्छा तो ओके तो…..ओके………

दूसरा  : OK

पहला : हो…ओ…..ओ…..मैं चला…आ……मै शायर……

 

 

जारी है……..

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 28, 2011

ये तेवर वही पुराने दिन याद दिला रहे हैं। मेरे लिए तो कुछ कहना और न कहना दोनों ही बराबर है क्यूंकि आप तो सब जानते ही हैं और मैं तो वहां हूँ ही। साभार,


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