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डर्टी वूमैन – विद्या बालान

Posted On: 10 Dec, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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हॉलीवुड के एक निर्देशक ने एक बार कहा था कि लोग कहते हैं कि हॉलीवुड फिल्मों में बहुत नग्नता और सैक्स होता है लेकिन भारतीय फिल्मों में जिस तरह से नग्नता और सैक्स पेश किया जाता है, वो कहीं ज्यादा खतरनाक है और अपराध को जन्म देता है| हॉलीवुड फिल्मों में नग्नता और सैक्स को स्पष्टतया दिखाया जाता है जब कि भारतीय सिनेमा में नग्नता और सैक्स आधे-अधूरे तरीके से इस तरह दिखाया जाता है कि कहीं ज्यादा उत्तेजना और जिज्ञासा का माहौल बनाता है और अपरिपक्व और अनुभवहीन मस्तिष्कों में आपराधिक भावनाओं को जन्म देता है|

 

लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि जिस तरह से हम भारतीय इस क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहे हैं, हम जल्दी ही हॉलीवुड की बराबरी कर लेंगे और समाज में अपराध का स्तर भी गिर जाएगा| अब हमारी नायिकाएं इतनी बेहया और तन दिखाने में इतनी दरियादिल हो चुकीं है कि बस पैसा देकर इनसे कुछ भी करवा लो| कभी दादा कोंडके के द्विअर्थी संवादों से सनसनी मचाने वाला भारतीय सिनेमा अब इतना विकसित हो चुका है कि सीधे स्पष्ट और अर्थपूर्ण संवादों का प्रयोग करता है| अब नायिका का कॉन्फिडेंस लेवल इतना हाई हो चुका है कि अगर उसे फिल्म में भद्दी गाली देनी है तो साफ-२ गाली ही देगी, किसी की फाडनी होगी तो बेहिचक फाडेगी, एक बार में समझ नहीं आयेगा तो दुबारा फाडेगी| बॉलीवुड के निर्देशकों को पता है कि समाज की आत्मा मर चुकी है और लोग फटी में फिल्म देखेंगे ही देखेंगे|

 

कल ही एक कवि-सम्मलेन में एक कवि कह रहे थे कि हमारी भारतीय संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और इसका कारण है भारतीय स्त्री का महान आचरण| वीर रस के कवि राज तिवारी ने अपनी कविता में भारतीय स्त्रियों की महिमा का वर्णन कुछ इस प्रकार किया- बच्चा-२ राम यहाँ का, बेटी जनक दुलारी है………रणचंडी बनकर उतरी थी, अरि का दिल दहलाती थी, लक्ष्मीबाई दोनों हाथों से तलवार चलाती थी….

 

अब हमारी भारतीय नायिकाएं अपने फूहड़ देह प्रदर्शन, भद्दी गालियों-संवादों, सैक्स और नग्नता का जीवंत प्रदर्शन कर लोगों का दिल दहलाने लगी हैं| गलती से कहीं इन आदरणीय कवियों को अगर रानी मुखर्जी या विद्या बालान जैसी प्रतिभावान नायिकाओं का जीवंत अभिनय प्रदर्शन देखने को मिल जाय तो शायद वे कोई और व्यवसाय ढूँढने लगें|   
 
स्कूल के दिनो में, जब कि सिर्फ दूरदर्शन ही मनोरंजन का साधन था, हर रविवार को हिन्दी फिल्म का प्रसारण किया जाता था| तब उस समय जब कि लोग दूरदर्शन पर कृषि दर्शन तक देखना नहीं चूकते थे तो हिन्दी फिल्म तो पूरे एक सप्ताह के धैर्य और तपस्या का फल होती थी और इसे छोड़ने का तो कोई सवाल ही नहीं होता था| ऐसे जमाने में भी जब कि सारे शहर के लोग हिन्दी फिल्म देखने में लीन होते थे और गलियाँ सुनसान हो जाया करती थीं, मेरा एक मित्र उस नायाब मनोरंजन को छोड़कर सुनसान गलियों में अकेला घूमा करता था|  

 

एक बार जब मैंने उससे इसका कारण पूछा तो उसका जवाब बड़ा दिलचस्प था| उसने बताया कि उसके पिता फिल्म के समाप्त होते ही उससे पूछते थे कि बताओ इस फिल्म से हमें क्या शिक्षा मिलती है? ठीक वैसे ही जैसे कि पंचतंत्र की हर कहानी के अंत में उससे मिलने वाली शिक्षा लिखी होती है| इस कठिन प्रश्न का जवाब देने से बचने का उसने ये आसान तरीका निकाला कि फिल्म देखी ही न जाय| न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी| तब मुझे उस मित्र की बात सुनकर हंसी आती थे, पर अब अहसास होता है कि उसका तरीका बड़ा ही प्रभावशाली था|

 

जब से ‘डर्टी पिक्चर’ फिल्म देखी है, मैं खुद से ही ये सवाल पूछ रहा हूँ कि इस फिल्म का मकसद क्या है? एक सी ग्रेड की फिल्मों की अभिनेत्री, जों कि अब इस दुनिया में नहीं है, उसको फिर से नंगा करके निर्माता, लेखक, निर्देशक और नायिका ने किस प्रतिभा का प्रदर्शन किया है? सिल्क स्मिता ने उस समय किन हालातों में इस प्रकार के रोल किये ये तो उन्हें ही पता रहा होगा| फिल्म के अनुसार सिल्क ने पैसे के अभाव में इस प्रकार के समझौते किये तो ‘डर्टी पिक्चर’ के निर्माता, लेखक, निर्देशक और कलाकार किन हालातों की वजह से इस घटिया स्तर पर उतरे? क्या से सिर्फ पैसे की हवस नहीं है कि इस तरह की घटिया और फूहड़ फिल्म बनाई गई और लोगों की भावनाओं का शोषण करके करोड़ों का बिजनेस कर लिया गया? सुना है कि इस फिल्म को देखने में सबसे बड़ा वर्ग स्कूली छात्रों और युवाओं का था| तो आप इस देश की युवा पीढ़ी को क्या शिक्षा दे रहे हो, सैक्स और नंगेपन की| भारतीय नारी का सिर्फ यही रूप बचा है फिल्म बनाने के लिए और युवाओं को दिखाने के लिए?

 

विद्या बालान नाम की कथित रूप से अत्यंत प्रतिभाशाली अभिनेत्री ३२ वर्ष की उम्र में कपडे उतारकर वो सब कर रही है जों कि एक कम उम्र की अपरिपक्व अभिनेत्री फिल्म इंडस्ट्री में अपने पैर जमाने और पैसा कमाने के लिए करती है| इस रोल से उन्होंने क्या पाने की कोशिश की है, भगवान जाने| मेरी नजर में तो विद्या बालान और सिल्क स्मिता में कोई अंतर नहीं है| दोनों ने ही सिर्फ पैसे के लिए ही इस प्रकार के फूहड़ रोल किये| अंतर बस ये है कि सिल्क ने ऐसे रोल सिर्फ पैसे के लिए किये जबकि विद्या बालान ने पैसा कमाने के साथ-२ लोगों को ये भी दिखाने की कोशिश की है कि इस बहन जी छाप हीरोइन में जवानी और हुस्न कूट-२ कर भले न भरा हो पर वो उछाल खूब मार रहा है| फिल्म के निर्देशक ने विद्या के जमकर किये अंग प्रदर्शन, अभद्र और भद्दे संवादों की मदद से अपरिपक्व लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर करोड़ों बटोरे हैं|

 

‘द डर्टी पिक्चर’ फिल्म की समीक्षा में फिल्म और विद्या बालान की तारीफ़ पढकर खुद को फिल्म देखने से रोक नहीं पाया| लेकिन फिल्म देखकर मैं असमंजस में हूँ कि क्या फिल्म समीक्षक बेवकूफ है या मुझे इस बात की गलतफहमी हो गई है कि मैं ज्यादा समझदार हूँ| जिन फिल्म समीक्षकों ने इस फिल्म की और विद्या बालान के अभिनय की तारीफ़ की है, मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों निर्माता, लेखक, निर्देशक और कलाकार, सभी ने फूहड़ नग्नता और सैक्स परोसकर समाज में गंदगी बढ़ाने में बढ़-चढ कर कार्य किया है और खेद प्रकट करना चाहता हूँ कि इस सामाजिक पतन में सहयोग से मैं सहमत नहीं हूँ|

 

सम्पूर्ण विश्व में भारतीय स्त्री की की छवि अत्यंत पुनीत और महान है और विद्या बालान ने उस छवि को चोट पहुचाने की कोशिश की है| विद्या बालान और उनके जैसी अन्य अभिनेत्रियां मेरी नजर में डर्टी वूमैन हैं|

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadhanathakur के द्वारा
December 14, 2011

सर ,,,,,,,,बहुत ही सार्थक लेख पढ़ कर सच में ये सोचने पर विवश हुई की आज सब कुछ बस बिकता है ,,मरे हुवे इंसान की इज्जत भी बिकती है………..

    December 15, 2011

    धन्यवाद साधना जी,….आपने लेख का खास हिस्सा पकड़ा है| धन्यवाद|

Rajkamal Sharma के द्वारा
December 13, 2011

प्रिय जुबली कुमार जी ….. नमस्कारम ! आपकी पिछली सी.डी. बहुत ही लेट मिली थी इस लिए बेकार हो गई थी ….. क्योंकि उससे पहले ही उस हुस्न परी कि सेटिंग महेश भट्ट से हो गई थी …. इसलिए अब तो नई बनने वाली फिल्म को देखने कि ही तमन्ना है ….. उम्मीद करता हूँ कि इस बार तो कम से कम आप लेट नहीं होंगे …… :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    December 15, 2011

    राजकमल जी नमस्कार, आप तो खुद ही छोटी-२ सीडियां (स्माइली) बाँट रहे हो आजकल| सनी लियोन और महेश भट्ट मिलकर एक फिल्म बनाएँ तो उसका नाम होगा- नाजायज….

Tamanna के द्वारा
December 12, 2011

राजेन्द्र जी, आपका लेख बेहद सार्थक है. जिस सिल्क स्मिता के जीवन पर यह फिल्म बनाई गई है मैंने इस फिल्म के आने से पहले उसके विषय में कभी कुछ नहीं सुना था. निश्चित तौर पर मेरे जैसे बहुत लोग हैं जो सिल्क स्मिता को जानते ही नहीं थे. लेकिन फिर भी मैं इतना जरूर जानती हूं कि वह कोई समाज सेविका या नोबल प्राइज विजेता नहीं थी.इसके अलावा वह कोई ऐसी शेख्सियत भी नहीं रही होंगी जिसने अपने कर्म और त्याग के कारण समाज का कुछ भला किया होगा. फिर ऐसे में उसकी जीवन लीला पर्दे पर प्रदर्शित करने का आश्य सिर्फ पैसा कमाना था. सिल्क स्मिता का नाम देकर सिर्फ इस पिक्चर ने एक एक्स्ट्रा अंक बटोरा है. यह सिर्फ एक फूहड़ और अश्लील फिल्म से अधिक और कुछ नहीं है.

    December 12, 2011

    तमन्ना जी, मुझसे जो एक-दो लाइनें इस लेख में छोट गई थीं, आपने पूरी कर दीं| वाकई में बहुत लोग हैं जो सिल्क स्मिता को जानते ही नहीं थे क्योंकि न तो वो कोई बड़ी एक्ट्रेस थी, न ही कोई समाज सेविका या नोबल प्राइज विजेता और न ही वह कोई ऐसी शेख्सियत थी जिसने अपने कर्म और त्याग के कारण समाज का कुछ भला किया| उसने दक्षिण भारतीय फिल्मों से होते हुए कुछ सी ग्रेड हिन्दी फिल्मों में भी फूहड़ और घटिया रोल किये थे| शायद उस बेचारी ने धन के अभाव के चलते मजबूरी में ऐसी घटिया फ़िल्में की होंगी, लेकिन वही काम अब प्रतिष्ठित अभिनेत्रियां कर रही हैं| प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

omdikshit के द्वारा
December 11, 2011

डर्टी है तो नग्नता होनी ही है.पैसा कमाने के लिए कुछ भी करेगी. बहुत अच्छा लेख,भरद्वाज जी.बधाई.

Santosh Kumar के द्वारा
December 11, 2011

भाई जी ,.सादर नमस्कार अभी तक मैंने यह फिल्म नहीं देखी है,..बाकी अबोध जी की बात से सहमत हूँ ,……फिल्मों में सब आम ही हो गया है ,..जब टेलीविजन पर अत्यंत उत्तेजक विज्ञापन आते हैं तो और आगे क्या कहा जा सकता है,….. रोक तो फेसबुक पर लगनी जरूरी है ,..जिसे कोई कोई देखता है ,..सबके लिए पूरी आजादी है ,..साभार

    December 12, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद संतोष जी| आपका इशारा बहुत सही है|

abodhbaalak के द्वारा
December 11, 2011

राजेंद्र जी फिल्म तो मैंने भी नहीं देखि पर उसके ट्रेलर तो नज़र आ ही रहे हैं और ट्रेलर कैसे हैं वो ………. आपकी बातो से मै बहुत हद तक सहमत हूँ की आजकल नंगापन बिक रहा है और उसे बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों को इसमें कोई हिचक नहीं है, सब बड़ी बात ये है की हम अब इस और ध्यान भी नहीं देते, हमारे लिए ये एक आम से बात हो गयी है, ये हमारे विकसित होने का ……………… एक बहुत ही अच्छी पोस्ट के लिए बंधाई http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    December 12, 2011

    अबोध जी आपकी इस बात पर कि ……..हम अब इस और ध्यान भी नहीं देते, हमारे लिए ये एक आम से बात हो गयी है ….मैं इसमें थोडा सा संशोधन करना चाहत हूँ कि हममे से कुछ लोग इन बातों पर ध्यान देते तो है पर उनकी गिनती बहुत कम है| बौलीवुड के निर्देशकों को पता है कि समाज की आत्मा मर चुकी है और लोग …….. में फिल्म देखेंगे ही देखेंगे|

    abodhbaalak के द्वारा
    December 12, 2011

    मेरे नंबर कब आएगा, बाद वाले तो ……… :( http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    December 12, 2011

    अबोध जी, आपकी प्रतिक्रिया का जवाब देने की सात-आठ बार कोशिश की पर पता नहीं वो पोस्ट क्यों नहीं हो रहा| बार-२ डुप्लिकेट कमेन्ट बता रहा है| अगर ये पोस्ट हो जाता है तो फिर से आपको जवाब देता हूँ|

    December 12, 2011

    शुक्र है खुदा का….. अबोध जी आपकी इस बात पर कि ……..हम अब इस और ध्यान भी नहीं देते, हमारे लिए ये एक आम से बात हो गयी है ….मैं इसमें थोडा सा संशोधन करना चाहत हूँ कि हममे से बहुत से लोग इन बातों पर ध्यान देते तो है पर उनकी गिनती बहुत कम है| इसीलिये मैंने लेख में भी लिखा है …….बौलीवुड के निर्देशकों को पता है कि समाज की आत्मा मर चुकी है और लोग …….. में फिल्म देखेंगे ही देखेंगे| प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद|

allrounder के द्वारा
December 10, 2011

नमस्कार भाई राजेंद्र जी , मैंने अभी पिक्चर देखी नहीं है, इसलिए ज्यादा कुछ कह पाना संभव नहीं है, मगर विद्या बालन मेरी पसंदीदा हेरोइन है और हमें नहीं भूलना चाहिए की विद्या ने आज के जमाने मैं भी परिणीता जैसी सामाजिक और मुन्नाभाई जैसी साफ़ सुथरी फिल्मों के अलावा पा फिल्म मैं अमित जी की माँ का चेलेंजिंग रोल निभाया था और एक एक्टर का काम ही होता है नए – नए चेलेंज का सामना करना, इसलिए मेरे विचार से विद्या वालन को इसके लिए दोषी ठहराना उचित नहीं होगा ! और बाई होलीवुड की फिल्मो से यदि हम तुलना करें तो उन जैसी नग्नता दिखाने के लिए वोलिवुड को एक जन्म और लेना होगा ! बाकी इस बात से मैं सहमत हूँ की फिल्मों मैं अश्लीलता तो बढ़ी है इन दिनों …..

    December 12, 2011

    सचिन भाई नमस्कार, विद्या बालन आपकी पसंदीदा हीरोइन है तो इसके लिए विद्या बधाई की पात्र है| मैं भी इससे सहमत हूँ कि विद्या ने परिणीता, मुन्नाभाई…..और पा जैसी फिल्म में चेलेंजिंग रोल किये हैं| पर एक बात मेरी समझ में आज तक नहीं आई कि हमारी अभिनेत्रियां अपना बेस्ट वेश्या के रोल में ही क्यों देती हैं? माना कि एक कलाकार का काम नए-२ तरह के रोल करना होता है पर क्या उनकी समाज के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या एक अभिनेत्री को अपना अभिनय साबित करवाने के लिए नग्नता, सैक्स और अश्लील संवादों का सहारा लेना जरूरी है? अगर कला के नाम पर हम इससे सहमत हैं तो क्यों मकबूल फ़िदा हुसैन जैसे महान कलाकार को इस देश से भागना पड़ा जो कि कला के नाम पर देवी-देवताओं की अश्लील पेंटिंग बना रहा था| सच्चा कलाकार तो वही है जो अपनी कला से बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह दे| ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं कृपया इसे अन्यथा न लें| आपका धन्यवाद|

Rajkamal Sharma के द्वारा
December 10, 2011

प्रिय जुबली कुमार जी ….. नमस्कारम ! भाई साहिब इस फिल्म कि डी.वी.डी. भी क्या आप ही सप्लाई करेंगे या किसी और को जहमत दूँ – कोई और घर देखूं ?…. हा हा हा हा हा हा हा जय श्री राधे कृष्ण शुभकामनाये और मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    December 12, 2011

    प्रिय राजकमल जी, आपने ये नहीं बताया कि पिछली बार जो आपको सन्नी लियोन की जो डीवीडी भेजी थीं, आपको कैसी लगीं? जब पिछली बार भी हमने दी थीं तो अब भी जरूर भेजेंगे| बस इन नायिकाओं का नख-शिख वर्णन यूं ही करते रहें| आपका धन्यवाद|


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