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वार्तालाप- 4

Posted On: 28 Dec, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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छोटे मियाँ:  जय हो गंगा मैया की….

बड़े मियाँ:  हर-हर गंगे …

गंगा तेरा पानी अमृत, जहर-जहर बहता जाय….. मेरा मतलब झर-झर बहता जाय…

छोटे मियाँ:  wine society of India से फोन आया था… भईया…

बड़े मियाँ:  क्या पेटी भेज रहे हैं?

छोटे मियाँ:  करीब आधा घंटा बात हुई… हाँ भेज रहे हैं… दो मेल भी आई है देख लें फिर बताते हैं आपको..

बड़े मियाँ:  अच्छा मैं देखता हूँ, मुंह में पानी आ गया…

भाई ये तो के एल पी डी * हो गयी….

छोटे मियाँ:  वो कैसे….

बड़े मियाँ:  मैंने सोचा मेरे मेल पर कोई गिफ्ट वाउचर भेजा है उन्होंने…

छोटे मियाँ:  रुकिए मेल देखता हूँ. क्या अपने ज्वाइन किया था..

बड़े मियाँ:  अभी तो नहीं….

छोटे मियाँ:  ज्वाइन कर लीजिए आपको भी फोन करेगा…

बड़े मियाँ:  ठीक है….कर लूँगा….

छोटे मियाँ:  और डिटेल भी समझा देगा.

बड़े मियाँ:  ओके……

वो लौ……कमबख्त तो मेरे सर पर आकर रुक गया है….

छोटे मियाँ:  हाँ रात में देखा था…

बड़े मियाँ:  उसे दो-चार लात तो लगाओ…..

छोटे मियाँ:  रुकिए अभी लात मार कर मैं उसे गिराता हूँ… आज तेल नहीं लगाया क्या सर पर.

बड़े मियाँ:  यार मैंने अपना सारा तेल तो तुम्हारे और …….. जी के सर पर खत्म कर दिया ना……..

छोटे मियाँ:  अब थैंक्स गिफ्ट देने का वक़्त आ गया है..

बड़े मियाँ:  हाँ मेरे सर पे खोप्पे का धडी भर तेल डालना, मुझे उसकी खुसबू बहुत पसंद है.

अब वो या तो फिसलकर मेरे पैरों पर जाकर गिरेगा या किसी और के सर पे………

छोटे मियाँ:  साले के ९८ कमेंट्स हैं… और आपके ८२. मैं जितना हो सके कर देता हूँ… आप उनके भी जवाब दे देना लंगूर की औलाद धड़ाम हो जायेगा.

बड़े मियाँ:  बस ९९ ही करने हैं …..ज्यादा नहीं…….

हमने तो स्साल्ला पूरा जंक्शन ही कैप्चर कर लिया…ही…..ही……

छोटे मियाँ:  सच कहा सब अपने लोग टॉप पर हैं…. खीं..खीं..खीं…..

बड़े मियाँ:  आज तो जम के चढेगी…..अंगूर की बेटी…..

आज शाम को एक मुर्गे की पूंछ का निमंत्रण आया है

छोटे मियाँ:  खाने के बाद दो चार पंख खोंस लीजियेगा बालों में ताकि जनता-जनार्दन को भी पता लग सके आचार्य खुजलीश की माया का…

बड़े मियाँ:  झींगा लाला हुम्मम ….करवाओगे क्या…
(थोड़ी देर की खामोशी)

बड़े मियाँ:  ओह….वाट अ रिलीफ….

छोटे मियाँ:  क्या हुआ?

बड़े मियाँ:  सू-सू करने गया था, पूरा टायलेट मैक्डोवेल की भीनी-२ खुशबू से महका आया.

छोटे मियाँ:  तेरे आने की जब खबर महके.. तेरी खुशबु से सारा घर महके..

आपके कमेंट्स का आंकड़ा भी अब ९०० को छूने वाला है…

बड़े मियाँ:  आज मदहोश हुआ जाए रे, मेरा मन…मेरा मन…मेरा मन….

छोटे मियाँ:  बिना सोडे के पिया जाए रे… मेरा मन….

बड़े मियाँ:  बिना पानी के पिया जाए रे…..

छोटे मियाँ:  ९० कमेन्ट हो गए हैं……  बस नौ और….

बड़े मियाँ:  ओ शरारत करने को ललचाए रे……मेरा मन….

छोटे मियाँ:  जलता है जिया मेरा भीगी-२ रातों में….

बड़े मियाँ:  जरा शाम का प्रोग्राम सेट कर लूं……..

छोटे मियाँ:  कर लीजिए
(थोड़ी देर की खामोशी)

बड़े मियाँ:  हो गया…….मेरे लेख पर जो …… का कमेन्ट है, वही अपने शाम का परमानेंट साथी है…….

छोटे मियाँ:  हाँ आपके एक लेख में पढ़ा था कमेन्ट में.. कि आप ही तो मेरे दो ……के साथी हो…

बड़े मियाँ:  …. जी को भी कमेन्ट भेजा है उसने, तुम्हारा भी जिक्र करता है वो……..

बस दो लगा के किस को कमेन्ट देगा भरोसा नहीं है, कई बार तो मुझे भी नहीं देता……

छोटे मियाँ:  अच्छा लगा….जानकर

बड़े मियाँ:  मन्नू तेरा हुआ ..अब मेरा भी होगा……

छोटे मियाँ:  याने…याने…याने….याने….

बड़े मियाँ:  लेख चढ गया………बाजू……..आज तो कई रिकार्ड ध्वस्त हो जायेंगे……..

छोटे मियाँ:  अच्छा एक बात बताएं … क्या हॉल ऑफ फ़ेम में में घुसने का कोई गुप्त रास्ता हैं…

बड़े मियाँ:  जब चाहो तब घुसवा दें …….वर्ना हाल ही गिरा देंगे….

छोटे मियाँ:  नींव ही खोद डालेंगे…

बड़े मियाँ:  वैसे भी अपना हाल क्या कम है?

छोटे मियाँ:  हॉल ऑफ गेम….. ही ही ही….

बड़े मियाँ:  हम तो जहाँ खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है…..

छोटे मियाँ:  अभी ऐसा कोई ड्राईवर नहीं पैदा हुआ जो शहनशा को चलती बस से गिरा सके और अभी तक कोइ ऐसी बस नहीं बनी जिसमे शहंशाह खड़ा हो सके..

बड़े मियाँ:  अब देखो ब्लाग्गर ऑफ द इयर……वेलेंटाइन किंग …..मुझे किसी ने बनाया थोड़े…..मैं तो खुद ही बन गया…….खी….खी….खी…….और अंगार चंद……..महर्षि खुज्लीश………जैसी उपाधियाँ…….

अब चलना चाहिए वर्ना तुम्हारी भाभी सचमुच के अंगारे कही मेरे सर पे …….वैसे ही आज तेल ज्यादा लग गया है…..

छोटे मियाँ:  १०० कमेन्ट हो गए…  ठीक है…. बाद में बात करते हैं…

बड़े मियाँ:  ओत्तेरे की…….

छोटे मियाँ:  काहे भईया….

बड़े मियाँ:  अच्छा बाय……

छोटे मियाँ:  बातों-२ में काम हो गया …  बाय….

बड़े मियाँ:  ओके तो ओके तो ओके……..

* के एल पी डी= कमबख्त लक पे धोखा

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद काशीवासी के द्वारा
December 30, 2011

जब तक रहे ग्लास में भईया, साथ में रहें आइसस्किया, हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए…. वो कड़कती सर्दियाँ और वो ख़ुमार सब याद हैं…

    January 2, 2012

    शुक्रिया वाहिद जी, दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन… लंबी-२ छोड़ते और लपेटते रहें…. खाए पिए हुए…..

allrounder के द्वारा
December 29, 2011

नमस्कार भाई राजेंद्र जी, दिलचस्प बार्तालाप जारी रखो अब सेंसर का खोई खतरा नहीं है सरखार की ओर से ! अच्छी पोस्ट और नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

    January 2, 2012

    धन्यवाद सचिन जी, हमें तो डर था कि पी एम के साथ-२ कहीं अन्गारचंद भी लोकपाल के दायरे में न आ जाय| आपने हमारी चिंता दूर कर दी|

अजय कुमार झा के द्वारा
December 28, 2011

बडी ही दिलचस्प शैली , अदभुत संवाद । रोचक पोस्ट

    January 2, 2012

    धन्यवाद अजय जी, इस कहानी में कुछ सच्चाई है और कुछ बात बनाई है….


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