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बिखरे हुए लम्हों को समेट लो

Posted On: 13 Apr, 2012 में

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लगता है मानो अभी, 

कल की ही बात है,

बस क्षण भर को झपकी सी आई थी,

सपनों की दुनिया में,

इस कदर खोए कि,

सदियाँ गुजर गई,

और दोस्त बिछड गए

 

बिखरे हुए लम्हों को,

समेट लो जितना समेट सकते हो,

कुछ अपनी कह लो,

कुछ हमारी सुन लो,

वरना ये वक्त है,

मुट्ठी से रेत की मानिंद निकल जाएगा

और तुम बस झाड़ते रह जाओगे,

हाथ में चिपके हुए कुछ वक्त के कण

 

आज फिर कुछ सुनहरी यादें,

तुम्हारे दिल के दरवाजे पर खटखटायेंगी,

अपने दिल के दरवाजे खुले रखना,

हंसकर उनका स्वागत करना,

तुम्हें मुस्कराहट भेजी है,

किसी ने जमाने भर की 

 

ता उम्र परवाह करते रहे,

जमाने भर की,

सदियाँ बिताई हैं तुमने,

परदों में रहकर,

अब निकलो भी खुद के दायरे से बाहर,

और देखो कि,

हम तुम्हें कितना चाहते हैं

नोट- ये कविता नहीं भावनाएं हैं|

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

April 17, 2012

दिव्या जी, संतोष जी, अबोध जी, जेएल  सिंह जी, दिनेश जी, चन्दन जी, अजय जी, अभि जी और अलका जी, आप सभी को सादर अभिवादन और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद| आपकी प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि आप मेरी भावनाओं को खूब समझे| आपका पुनः: धन्यवाद|

alkargupta1 के द्वारा
April 14, 2012

उमड़ती घुमड़ती भावनाएं जब हृदय से बाहर निकलतीं हैं तो वह एक सुन्दर कविता का रूप ले लेती है……सुन्दर भावनाएं व मनोहारी कृति……

abhii के द्वारा
April 14, 2012

सुन्दर अभिव्यक्ति ….

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 14, 2012

आप की भावनाओं को सलाम………. और आप को सादर प्रणाम. सुन्दर…….. आभार….

jlsingh के द्वारा
April 14, 2012

आज फिर कुछ सुनहरी यादें, तुम्हारे दिल के दरवाजे पर खटखटायेंगी, अपने दिल के दरवाजे खुले रखना, हंसकर उनका स्वागत करना, तुम्हें मुस्कराहट भेजी है, किसी ने जमाने भर की और मैंने भी मुस्कुराना सीख लिया गम में भी कैसे खुश रह सकते वो बहाना सीख लिया! दिल के दरवाजे खुले रखे थे, उन्होंने आना जाना सीख लिया! नमस्कार राजेंद्र भाई जी! अंगार में भी शीतल छांव होती है यह भी पहचानना सीख लिया! बहुत बहुत साधुवाद!

चन्दन राय के द्वारा
April 14, 2012

मित्र , कवी भावनाओं का पुतला ही होता है मित्र , और कविता भावनाओं की पुडिया तो मित्र आपके सच्चे भावो ने मन को छुआ

dineshaastik के द्वारा
April 14, 2012

भावपूर्ण  सुन्दर अभिव्यक्ति….बधाई…….

Santosh Kumar के द्वारा
April 13, 2012

आदरणीय भाई जी ,.सादर नमस्कार आपकी भावनाओ को नमन ,.सुनहरी यादें दिल का दरवाजा पूरा खोल देती हैं ,….सादर आभार

    abodhbaalak के द्वारा
    April 13, 2012

    और ब्रदर कैसे हो? बहुत दिनों बाद आपको पढ़ा…………. आप कैसे लिखते हो उसपर कमेन्ट करने की औकात मेरी नहीं …………… बस ऐसे ही सदा लिखते रहो यही …………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    jlsingh के द्वारा
    April 14, 2012

    प्रिय अबोध जी, आजकल न तो छोटी सी बात आ रही, न ही बड़ी बात क्या एक ही बार ज्वार- भाटा आयेगा!

div81 के द्वारा
April 13, 2012

आज फिर कुछ सुनहरी यादें, तुम्हारे दिल के दरवाजे पर खटखटायेंगी, अपने दिल के दरवाजे खुले रखना, हंसकर उनका स्वागत करना, तुम्हें मुस्कराहट भेजी है, किसी ने जमाने भर की…………………………. बहुत खूबसूरत भावनाये या खूबसूरत भावनाओ से सजी खूबसूरत कविता


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