अंगार

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तुम इतनी जल्दी भूल गए!

Posted On: 7 Oct, 2012 Others में

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आजाद हो अपना ये वतन
और गुलामी की बेड़ियाँ न रहें
इसलिए हमने हर जुल्म सहे और
हँसते-हँसते फांसी झूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
तुम इतनी जल्दी भूल गए|



हम भी थे आँखों के तारे
अपने घर के राजदुलारे
पर जब से धरती को माँ समझा
घर, माँ-बाप सब भूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
तुम इतनी जल्दी भूल गए|



हम पर भी था नवयौवन आया
हम भी चढ़ सकते थे घोडी पर
बना लिया कफ़न को सेहरा
और फांसी पर झूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
तुम इतनी जल्दी भूल गए|



इस धरती की पूजा की हमने
इसकी खातिर ही प्राण दिये
गांधी-नेहरु ही याद रहे सबको,
शहीदों की शहादत सब भूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
तुम इतनी जल्दी भूल गए|



लहू हमारा भी गर पानी होता
हम भी सत्ता का सुख पाते,
हमारी संतानें राज करेंगी,
हम ये हिसाब लगाना भूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
तुम इतनी जल्दी भूल गए|



शहीदों की शहादत को
इस कदर बिसराया है तुमने
कि पाकिस्तान में याद हुए हम
पर हिन्दुस्तानी भूल गए
यकीं नहीं होता है हमको
हमारे अपने ही भूल गए|

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
October 10, 2012

बहुत सुन्दर कविता है हम पर भी था नवयौवन आया हम भी चढ़ सकते थे घोडी पर बना लिया कफ़न को सेहरा और फांसी पर झूल गए यकीं नहीं होता है हमको sabhar

    October 12, 2012

    यमुना जी, शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए आपका धन्यवाद…

yogi sarswat के द्वारा
October 10, 2012

हम भी थे आँखों के तारे अपने घर के राजदुलारे पर जब से धरती को माँ समझा घर, माँ-बाप सब भूल गए यकीं नहीं होता है हमको तुम इतनी जल्दी भूल गए| बहुत खूब ! गज़ब के शब्द और सुन्दर भाव

    October 12, 2012

    योगी जी, शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए आपका धन्यवाद…

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
October 8, 2012

भारद्वाज जी ,बहुत ही अच्छी प्रस्तुति,सच्चे भाबो से परिपूर्ण मार्मिक रचना …आभार

    October 12, 2012

    अनुराग जी, शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए आपका धन्यवाद…

Santosh Kumar के द्वारा
October 7, 2012

आदरणीय भाईजी,..सादर नमस्ते जोर से सालती बेहतरीन रचना ,. उनका दर्द असहनीय है ,..हम उनको एक दिन के लिए भी भूल नहीं सकते हैं ,..उनके सपने साकार कर ही सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं ,..अन्यथा उनके गुनाहगार ही रहेंगे ,…सादर आभार


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