अंगार

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प्यार दो, प्यार लो

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अब आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि……. ‘ऊपर वाला जब भी देता है, छप्पर फाड के देता है’. ऐसा ही कुछ १४ फरवरी अर्थात वेलेन्टाइन डे को मेरे साथ भी होने वाला है. यानी कि जब मुझे ना केवल जन्म-जन्मांतर का सच्चा प्यार भी मिलेगा बल्कि मैं वेलेन्टाइन किंग का ख़िताब भी जीतूंगा. यदि लक्ष्मी देवी की कृपा भी रही तो किसी स्विस बैंक अकाउंटधारी कुबेरचंद की कन्या का दिल भी मुझ पर आ सकता है. १४ फरवरी को पूरा दिन मैं किसी घास-फूस की झोपड़ी में रहूँगा ताकि ना तो उपरवाले को छप्पर फाड़ने में ज्यादा दिक्कत हो और ना ही इस मंहगाई के ज़माने में मजबूत लिंटर वाली अपनी छत तुडवाने की बेवकूफी करनी पड़े.

 

भले ही बचपन से आज तक प्रेमिका के सच्चे प्यार के लिए तडपता रहा लेकिन कहते हैं ना…..’ऊपर वाले के घर देर है पर अंधेर नहीं’. वो तो जय हो संत वेलेन्टाइन देव की जो उन्होंने मेरे जैसे सच्चे आशिकों के लिए कम से कम साल के एक दिन तो प्यार के दरवाजे खोले. बल्कि मैं तो कहूँगा कि इस महान दिवस को तो राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाना चाहिए जिससे कि इस देश में लोग कम से कम एक दिन तो सब कुछ भूल कर सिर्फ प्यार ही प्यार करें. वैसे मेरे ज्योतिषी मित्र भविष्य प्रकाश ‘शास्त्री’ ने कुछ दिन पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी थी कि ना केवल सन २०१३ की १४ फरवरी के पावन दिवस अर्थात वेलेन्टाइन डे के अवसर पर मेरे भीतर के तडपते प्रेमी की सभी ख्वाहिशें पूरी हो जायेंगी, बल्कि पूरे फरवरी महीने में मुझ पर प्रेम देव की अपार कृपा रहेगी. भविष्य प्रकाश का कहना अक्षरशः सही निकला, पहली फरवरी से ही मैं जिधर भी जा रहा हूँ, सुन्दर-सुन्दर कन्याएं मुझे प्यार और हसरत भरी निगाहों से देख-देख कर मदहोश हुई जा रही हैं. निश्चित ही उन्हें भी अपने प्यार का इजहार करने के लिए १४ फरवरी का बड़ी बेसब्री इंतजार होगा.

 

लगता है यही वो शुभ समय है कि मुझे अपनी भावी प्रेमिका(ओं) के लिए अपना भावनात्मक प्रेम-सन्देश प्रसारित कर देना चाहिए…….तो…….

 

हे देवियों, इस पावन प्रेम दिवस के अवसर पर आपके तडपते दिल को सुकून देने के लिए संत वेलेन्टाइन जी ने मुझे भेजा है आपको प्यार करने के लिए. अब इस प्रेम-विरह की वेदना में आपको और जलने नहीं दूंगा……मैं हूँ ना- प्यार का देवता,……. यानी कि राजाओं में इन्द्र है जो. वैसे लोग मुझे अंगार चंद भी कहते हैं क्योंकि जो मुझे प्यार नहीं करते, मैं उन पर अंगारे बरसा देता हूँ. उम्मीद है कि आप ऐसी स्थिति नहीं आने देंगी. कई जन्मों से आपका मन जिस सच्चे प्यार के लिए भटक रहा था, वो आज आपके सामने खड़ा है, यानी कि आपकी वर्षों की तपस्या सफल हुई, आपके सपने सच हुए. तो फिर इंतजार किस बात का है, दौड कर आओ और अपना प्यार पा लो. हालांकि इस प्रेम की प्रतियोगिता में एक वर्ग विशेष की प्रेमिकाओं को भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन उनको भी खुली छूट है कि वो मुझे जी भर के प्यार करें, मेरी तरफ से कोई प्रतिबंध नहीं है. और जहाँ तक पुरस्कार की बात है तो मेरे से बड़ा पुरस्कार, यानी कि स्वयं मैं, प्यार का देवता आपको इस दुनिया में और कहाँ मिलेगा भला.

 

तो…. हे देवियों, मेरे ह्रदय को अपने प्यार से झंकृत करने में देर मत करो क्योंकि मेरे ह्रदय में प्यार का संचार करने वाली लाइनें सिर्फ १४ फरवरी तक ही खुली रहेंगी. और हाँ, क्योंकि मैं ठहरा प्यार का देवता, मैं किसी का भी दिल तोड़ने में यकीन नहीं रखता. इसलिए जितनी भी कन्याओं के प्रणय-निवेदन मेरे पास आयेंगे, विदाउट स्क्रुटनी मैं सभी के सभी सहर्ष स्वीकार कर लूँगा. हालांकि फ़िल्मी हीरोइनों को मैं बहुत पसंद तो नहीं करता, पर इस पावन पर्व के दिन मैं बालीवुड बालाओं का प्यार भी स्वीकार कर लूँगा. वैसे तो डार्विन के ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ के सिद्धांत पर अमल करते हुए एक प्रेमिका दूसरी प्रेमिका को बर्दाश्त नहीं कर सकती, लेकिन प्रकृति के विपरीत यदि आप आपस में मिल-जुल कर मुझे प्यार करेंगी तो विश्वास कीजिये, मैं सभी को बराबर प्यार दूंगा, ये इस अंगार चंद का वादा है.

 

तो आदत के अनुसार एक प्यार भरी झिलाऊ तुकबंदी पेश है, कृपया दाद देकर खुज…….मेरा मतलब प्यार फैलाएं-

 

‘संत वेलेन्टाईन जी ने बना के हसीं वेलेन्टाईन डे

आप हसीनों को मुझसे प्यार करने की परमिशन दी है’

 

आप सभी को इस प्यार के देवता राजेंद्र का प्रेम-पूर्ण अभिवादन और वेलेन्टाइन डे की हार्दिक शुभकामनाएं……..

 

संत वेलेन्टाइन जी अमर रहें……. वेलेन्टाइन डे जिंदाबाद……..

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54 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
February 15, 2013

राजेन्द्र जी , बस इतना ही कहूँगी…बहुत खूब…बहुत अच्छा लिखा है…… संत वैलेनटाइऩ जी अमर रहे……वैलेनटाइऩ डे जिंदाबाद ….

    राजेन्द्र भारद्वाज के द्वारा
    February 16, 2013

    अलका जी संत वैलेंटाइन जी की कृपा सब पर बनी रहे….

आर.एन. शाही के द्वारा
February 15, 2013

च्च-च्च-च्च-च्च ! ‘एक बेचारा …हाऽ ! प्यार का मारा …हाऽ !!’ हा-हा-हा-हा । ऊपर भगवान के बाद नीचे सिर्फ़ यह बन्दा (मैं) ही जानता है, कि यह व्यंग्य-व्यंग्य नहीं, बल्कि एक निराश और हताश प्यार के पंछी के दर्द भरे ‘नाले’ हैं, जो बिल्कुल असली हैं । जैसे बियाबान में डर लगने पर कोई ज़ोर-ज़ोर से गाते हुए रास्ता काट लेता है, कुछ वैसे ही हैं ये नाले । लेकिन इस बार दुआएँ अवश्य क़ुबूल होंगी । इस चीत्कार से भी किसी नजानीन के कान न फ़टे, तो फ़िर क्या आशिक़ी, और कैसी मौशिक़ी ? रहम कर परवर-दिगार, रहम कर !! आमीन !

    राजेन्द्र भारद्वाज के द्वारा
    February 16, 2013

    गुरुदेव, कृपया इस आधुनिक युग के उस प्रसिद्द मुहावरे का ख़याल रखें- ”ये अंदर की बात है” या फिर प्राण के ऊपर फिल्माए गए गाने- ”इशारों को अगर समझो, राज को राज रहने दो” का ही ख़याल रखें….हमारी असफलताओं की गाथा हर कोई सुने, ये ठीक नहीं है…. संत वैलेंटाइन जी की कृपा आप पर भी सदैव पर बनी रहे….

    आर.एन. शाही के द्वारा
    February 16, 2013

    चलिये पकड़ा कान ! दोबारा यह राज़ होठों पर नहीं आएगा । लेकिन यह सीख ज़रूर देना चाहूँगा, कि एक ‘लेडी-किलर’ वाली सूरत पाकर भी आखिर आप खुदा की इस नेमत से अब तक महरूम क्यों रहे, आपको संज़ीदगी के साथ इसका विश्लेषण करना चाहिये । मैंने बहुतों को आपके क़रीब आते महसूस किया, और फ़िर उसी शिद्दत के साथ छिटक कर दूर होते भी इन्हीं आँखों ने देखा । क्यों ? इसलिये, क्योंकि आप किसी क्षुधा-पीड़ित जैसे भाव में आ जाते हैं, गोया अभी नहीं, तो कभी नहीं । अब भी कुछ बिगड़ा नहीं है, झुर्रियों के कुछ और लटकने से पहले ट्राई मारने का अभी ढेर सारा वक़्त है । हो सके तो इस ‘अमृत-वाणी’ के पठन के बाद कमेंट डिलीट कर दें, फ़्री में दूसरे इस टिप का कहीं नाजायज़ फ़ायदा उठा गए, तो फ़िर आपका क्या होगा ?

    February 16, 2013

    आपकी इस ‘अमृत-वाणी’ पर तो मैं खामोश रहना ही पसंद करूँगा पर इसे डिलीट नहीं करूँगा क्योंकि वैसे ही आजकल कमेंट्स का भयंकर सूखा चल रहा है| इसीलिए आजकल पुरानी पोस्ट्स को ही रिपोस्ट कर रहा हूँ जिससे कि ज्यादा कमेंट्स दिखाई दें और इज्जत बची रहे| आप तो जानते ही हैं कि कमेंट्स कितनी मेहनत से दूसरों को खुजा-२ कर प्राप्त होते हैं| आज के जमाने में जिस लड़की का कोई बॉयफ्रेंड न हो और जिस लेखक का कोई कद्रदान न हो, उनकी समाज में कोई इज्जत नहीं होती|

    आर.एन. शाही के द्वारा
    February 16, 2013

    बात तो आपकी सोलह आने प्रैक्टिकल लगती है, परन्तु फ़िर भी यही कहूँगा कि इस मामले में थोड़े परिवर्तन के साथ अपनी पिछली नीति पर ही लौट जाइये, अर्थात ‘कमेंट की कोई चिन्ता नहीं’ वाली नीति पर, तो सुखी रहेंगे । परिवर्तन का अर्थ यह कि आपकी पिछली वाली नीति में यह खामी थी कि आपका भाव न कमेंट लेंगे, न देंगे वाला था । उसमें आपका भाव समाज से कट कर रहने वाला था, जो एक सांसारिक व्यक्ति के लिये लाभदायक नहीं होता । आपको कमेंट मिले या नहीं, परन्तु कम से कम अपनी जानपहचान वालों की पोस्ट पर जाकर उन्हें आप अपना कमेंट अवश्य दें, तो फ़िर सारा समीकरण देर-सबेर खुद-ब-खुद दुरुस्त हो जाएगा । हाँ, यह सबकुछ तभी चल पाएगा जब आपके पास मंच को देने के लिये पर्याप्त समय हो । आजकल सक्रिय हैं तो मेनटेन कर सकते हैं । हमें नहीं भूलना चाहिये कि हम कोई लेखक-वेखक नहीं हैं, बल्कि ब्लागर सोसाइटी में भी काफ़ी सतह पर रेंगने वाले जीव हैं । आज नेट पर पूरी दुनिया का दुर्लभ साहित्य मुफ़्त में उपलब्ध है । जिसे सचमुच पढ़ने की ललक है, वह कम से कम सोशल नेटवर्किंग साइट्स का पाठक तो नहीं ही है । हम कोई ऐसे नेता भी नहीं हैं, जिसके भाषण को लोग बिना अपनी सुनाए सुनते ही चले जाएँ । कुछ लोग जो सचमुच बहुत ही स्तरीय लिखते हैं, उन्हें जानने वाले उन्हें चुपके से पढ़ कर निकल लेते हैं । कमेंट इसलिये नहीं देते, क्योंकि दूसरा भी उन्हें कभी घास नहीं डालता । ब्लाग लेखन सिर्फ़ विचार अभिव्यक्ति और उसके आदान-प्रदान का माध्यम भर है, और टिप्पणियों का आदान-प्रदान इसका अविभाज्य आभूषण । जहाँ तक हो सके, प्रेम की गंगा बहाते चलो, और कुछ नहीं रखा कहीं भी । यहाँ गुलज़ारी के लिये शिवानियों और गुलशन नन्दाओं की नहीं, बल्कि मिश्रित प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, जो लेखक, पत्रकार और साहित्यकार से अधिक एक अच्छे इंसान के गुणों से सम्पन्न हों, सामाजिक मेल-मिलाप वाले नेचर से परिपूर्ण । आपकी हास-परिहास वाली टिप्पणी पर इतना गम्भीर भाषण झाड़ दिया, हम भी कभी नहीं सुधरने वाले ।

    February 17, 2013

    नीति तो अपनी वही है अर्थात कमेंट की कोई चिन्ता नहीं| रही बात परिचितों के पोस्ट पर कमेंट्स की तो अपनी और से कोशिश करता रहता हूँ लेकिन अब कमेन्ट की प्रक्रिया को जेजे ने जटिल सा बना दिया है| इसकी वजह से कई बार कमेंट्स पोस्ट ही नहीं हो पाते| आपकी बात सही है कि हमें सामाजिक होना चाहिए पर साथ ही हम लोग आम इंसान ही हैं और कई बार भावनाएं हम पर हावी भी हो जाती हैं| यही कारण है कि बहुत से पुराने साथी इस मंच से दूर हो गए हैं, कुछ समय के लिए आप और मैं भी हुए थे| बाकी आपके उपदेश सर-माथे पर, कृपया अपना स्नेह यूं ही बनाए रखें|

shalinikaushik के द्वारा
February 15, 2013

manoranjak post .aabhar

    राजेन्द्र भारद्वाज के द्वारा
    February 16, 2013

    संत वैलेंटाइन जी की कृपा सब पर बनी रहे….

jlsingh के द्वारा
February 14, 2013

मुझे भी बड़ी खुजली हो रही है …. कही से ‘गुरुदेव’ यानी राजकमल जी आकर खुजा न दे!

    राजेन्द्र भारद्वाज के द्वारा
    February 16, 2013

    लगता है राजकमल जी पर संत वैलेंटाइन जी की इतनी ज्यादा कृपा हो गई है कि वो अपनी वैलेंटाइन के अलावा बाकी सब को भूल गए हैं…

deepak badwal के द्वारा
February 13, 2012

जवाब नहीं भाईसाहब आपका…. मेरी हार्दिक अग्रिम शुभकामनाएं वेलंटाइन किंग बनने के लिए

    राजेन्द्र भारद्वाज के द्वारा
    February 16, 2013

    जय हो बाबा वैलेंटाइन जी की….

sanju uniyal के द्वारा
February 12, 2011

आप ने बुलाया तो आपकी प्रेमिका रम कुमारी विश्की देवी तुरंत आप के पास आ रही हैं, जरा बच कर कंही कॉकटेल न हो जाये

    February 12, 2011

    अच्छा भैया पहुँच गए यहाँ पर, तो क्या हुआ ….बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा……पढ़ते रहो और मजा लूटो…..

R K KHURANA के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय राजेन्द्र जी, अगर आप इतना अच्छा लेख लिखेंगे तो कोइ भी आपको वेलेन्टाइन किंग बनने से नहीं रोक सकता ! मेरा आशीर्वाद आपके साथ है ! शुभकामनायों सहित ! आर के खुराना

roshni के द्वारा
February 10, 2011

रतुरी जी /भारदवाज जी हास्य व्यंग का एक और dose लेकर आगमन ……..बहुत बढ़िया है बेस्ट Wishes

    February 10, 2011

    धन्यवाद रोशनी जी, आपको बढ़िया लगा है तो फिर ठीक ही होगा. आपको भी बेस्ट विशेज.

nishamittal के द्वारा
February 9, 2011

बहुत अच्छा कटाक्ष भारद्वाज जी.

    February 9, 2011

    धन्यवाद निशा जी कि आपने इस कटाक्ष को समझा और प्रतिक्रिया दी.

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 8, 2011

रतूड़ी जी …… आपको वैलेंटाइन किंग बनने की अग्रिम बधाइयाँ….. पार्टी में हमें भी बुलायियेगा …..

rajkamal के द्वारा
February 8, 2011

भईया सीधे -२ क्यों नहीं कहते कि आपको खुजली कम गुदगुदी चाहिए …… इस प्रतियोगिता में उतरने का कलेजा रखने के लिए आपके ज़ज्बे को सलाम बधाइयाँ आभार सहित

    February 8, 2011

    भाई राजकमल जी, अब आपका कहा मैं कैसे टाल सकता था. हालांकि इन मजनुओं की भीड़ में पिटने के पूरे चांसेज हैं पर मैंने किसी तरह अपना कलेजा मजबूत कर ही लिया……..

    February 8, 2011

    गोरी हो, काली हो या नखरे वाली हो……कैसी भी गुदगुदी करा दे……

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 8, 2011

    उस गुदगुदी में भी आधा हिस्सा हमारा है|

    February 8, 2011

    पूरी गुदगुदी तुम्ही ले लो भैया ….

Amit Dehati के द्वारा
February 7, 2011

भ्राता श्री बहुत ही मनोभावन लेख ! बहुत बहुत धन्यवाद ! आपको कांटेस्ट की ढेर सारी शुभकामनाये !

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 7, 2011

भाई राजेंद्र जी…… बड़ी देर से आए पर दुरुस्त आए…….. आपसे एक बड़े धमाल की आशा है… इस मनोरंजक रचना के लिए बधाई… ओर इस प्रतियोगिता के लिए हार्दिक शुभकामनए……….

    February 7, 2011

    पियूष जी नमस्कार, समयाभाव के कारण मैं आपको प्रतिक्रियाएं नहीं दे पाता हूँ, अतः क्षमा प्रार्थी हूँ, पर आप अपना ये धर्म निभातें रहें तो मैं आपका आभारी रहूँगा. आपको भी मेरी और से हार्दिक शुभकामनाएं.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 8, 2011

    पीयूष जी बिलकुल सही कह रहे हैं.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 7, 2011

भईया, कहाँ है वो झोपड़ी?हम तो अभी से वहीं कूच करने के लिए तैयार बैठे हैं|छप्पर फटते समय हम भी कुछ लपक लेंगे..छोटे भाई को भी कुछ हक़ है ही आखिरकार|

    February 7, 2011

    भाई वाहिद, तुम तो छप्पर के ऊपर ही बैठ जाना, जो कुछ भी है भाई, तुम्हारा ही तो है.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 8, 2011

    बड़े चतुर निकले आप तो, हमें ऊपर ही बैठा रहे हैं ताकि छप्पर के साथ हम भी…..

    February 8, 2011

    छप्पर से ही जोड़ी बना के गिरना…मेरा मतलब उतरना…..

abodhbaalak के द्वारा
February 7, 2011

बहुत ही सुन्दर रचना राजेंद्र जी, आप अच्छा लिखते हैं पर पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है की यी आपके स्टार से थोडा ……….. या शायद मेरा एक्स्पेकटेशन…………… कांटेस्ट के लिए मेरी शुभकामनाएं http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rajendra raturi के द्वारा
    February 7, 2011

    अबोध जी शायद आप बिलकुल सही कह रहे हैं. जैसे कि गीतकार नीरज जी ने जब ये गीत लिखा था- ‘धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल……’ तो वे खुद पर ही बहुत शर्मिंदा हो गए थे कि और उन्होंने माना था कि उन्होंने ये गीत लिखा…….उसी प्रकार आज मैं भी खुद पर शर्मिंदा हो रहा हूँ…… पर ये मेरे ख़ास भाइयों, राजकमल जी और वाहिद जी की गुजारिश थी कि मैं इस प्रतियोगिता में भाग लूं, वर्ना कहाँ प्यार और कहाँ ये अंगार……..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 8, 2011

    कुछ ऐसा ही वाकिया हरिवंश रायबच्चन के साथ हुआ – मेरे अंगने में और रंग बरसे में|

    February 8, 2011

    बिलकुल ठीक पकड़ा वाहिद.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 7, 2011

यानि आपने अपने वैलेंटाइन डे को जबरदस्त बनाने का पूरा इंतजाम कर लिया है .. चलिए हमारी भी दुआ है की ऊपर वाला आपका छप्पर फाड़ ही दे… बहुत जबरदस्त लेख है …पढ़कर मजा आया .. एक अनुरोध है अगर ऊपर वाला ज्यादा दे दे तो हम छोटो का भी ध्यान रखियेगा.. जय हो वैलेंटाइन बाबा की

    February 7, 2011

    निखिल भाई मुझे आप जैसे भाई का पूरा ख्याल है, छप्पर फटते वक्त आप साथ ही रहना, क्योंकि मुझे लगता है कि वो जब भी आयेगी, अपनी छोटी बहन को साथ जरूर लायेगी…….

deepak pandey के द्वारा
February 7, 2011

भैया राजेन्द्र जी, हमारी दुआ आपके साथ है. इस दिन आपकी हर कामना पूरी हो.

    February 7, 2011

    धन्यवाद दीपक जी, पर मैं चाहता हूँ की मुझसे पहले मेरे भाइयों की हर कामना पूरी हो….शुभकामनाओं सहित…..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 8, 2011

    आप जुदा थोड़े ही हैं…

    February 8, 2011

    तुमसे मिलकर ना जाने क्यूं और भी कुछ याद आता है…..

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 7, 2011

श्री राजेन्द्र जी, सबसे पहले तो मई बहुत कन्फ्यूज हो गया हूँ…आपके नाम और फोटो से… बहुत खूबसूरत और कुछ कहता हुआ लेख.. शुभकामनाओं सहित, आकाश तिवारी


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