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बांटो खुशियाँ होली में

Posted On: 26 Mar, 2013 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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ऐसी जमकर खेलो होली
कि मन का मैल धुल जाय
तेल लगाना कभी मत भूलो
कि खुजली ना हो जाय

 

कि खुजली ना हो जाय
रंग लगाओ ऐसे अच्छे-अच्छे
खुजली का डर भूल के
खेलें सब बूढ़े-बच्चे

 

खेलें सब बूढ़े-बच्चे
चहुँ और उल्लास छा जाय
होली की इस मस्ती में
सब दुःख-दर्द भूल जायं

 

सब दुःख-दर्द भूल जायं
तो बांटों खुशिया सबको
धेला खर्च ना होता इसमें
तो फिर डर किसका तुमको

 

इस होली में दोस्तों
फाड़ दो पोटली सबकी
क्या जाने कब आ जाय
ऊपर जाने की बारी किसकी

 

कह ‘राजेन्द्र’ कविराय
साथ कोई कुछ न ले जा पाता
कपड़ा-लत्ता तक दोस्तों
यहीं छूट है जाता|

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 28, 2013

कि खुजली ना हो जाय रंग लगाओ ऐसे अच्छे-अच्छे खुजली का डर भूल के खेलें सब बूढ़े-बच्चे खेलें सब बूढ़े-बच्चे चहुँ और उल्लास छा जाय होली की इस मस्ती में सब दुःख-दर्द भूल जायं खुजली तो आज हो रही होगी जब पक्का रंग उतरेगा ! लेकिन आपका रंग जल्दी नहीं उतरने वाला ! बड़ा गहरा रंग दिया है आपने रचना में

jlsingh के द्वारा
March 26, 2013

आदरणीय राजेंद्र जी, सादर अभिवादन! आपने तो खुशियाँ बांटते- बांटते सुख दुःख से छुटकारा के भी रास्ते बता दिए! वही है अंतिम सत्य जाना सबको वहीं है कपड़ा लत्ता, दौलत को रह जाना यहीं है! होली की शुभकामनाएं!


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